इजराइल 'कैंसर-रूपी' राष्ट्र... पाक मंत्री ख्वाजा आसिफ ने किया पोस्ट, नेतन्याहू ने उठाए सवाल

इस्लामाबाद में होने वाली अहम वार्ता से पहले पाकिस्तान और इजरायल के बीच बयानबाजी ने तनाव बढ़ा दिया है. इस विवाद का असर शांति प्रयासों और क्षेत्रीय हालात पर पड़ सकता है, जबकि युद्धविराम भी दबाव में है.

Shraddha Mishra

शांति की कोशिशों के बीच एक नया विवाद खड़ा हो गया है. इस्लामाबाद में होने वाली अमेरिका-ईरान वार्ता से पहले ही इजरायल और पाकिस्तान के बीच बयानबाजी ने माहौल गर्म कर दिया है. ऐसे समय में, जब दुनिया इस बातचीत से राहत की उम्मीद कर रही थी, दोनों देशों के बीच बढ़ता तनाव नई चिंता पैदा कर रहा है.

पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने इजरायल पर लेबनान में "नरसंहार" करने का आरोप लगाया. उनकी इस टिप्पणी के बाद इजरायल ने कड़ी प्रतिक्रिया दी और इस्लामाबाद की मध्यस्थ की भूमिका पर सवाल उठा दिए. इजरायल के प्रधानमंत्री कार्यालय ने इस बयान को बेहद आपत्तिजनक बताते हुए कहा कि ऐसे बयान किसी भी हालत में स्वीकार नहीं किए जा सकते, खासकर उस देश से जो खुद को शांति वार्ता में निष्पक्ष बताता है.

सोशल मीडिया पोस्ट ने भड़काया मामला

ख्वाजा आसिफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कई तीखी टिप्पणियां कीं. उन्होंने इजरायल को "मानवता के लिए खतरा" बताया और आरोप लगाया कि गाजा, ईरान और अब लेबनान में लगातार निर्दोष लोगों की जान ली जा रही है. उनकी एक टिप्पणी और ज्यादा विवादित रही, जिसमें उन्होंने इजरायल के निर्माण को लेकर बेहद सख्त शब्दों का इस्तेमाल किया. इन बयानों ने इजरायल को नाराज कर दिया और दोनों देशों के बीच दूरी बढ़ा दी.

ख्वाजा आसिफ ने पोस्ट में लिखा कि, "इजराइल बुराई का प्रतीक है और मानवता के लिए एक अभिशाप है; जहां एक ओर इस्लामाबाद में शांति वार्ता चल रही है, वहीं दूसरी ओर लेबनान में नरसंहार किया जा रहा है. इजराइल द्वारा निर्दोष नागरिकों की हत्या की जा रही है. पहले गाज़ा, फिर ईरान और अब लेबनान, खून-खराबा बिना किसी रुकावट के जारी है. मैं आशा और प्रार्थना करता हूं कि जिन लोगों ने यूरोपीय यहूदियों से छुटकारा पाने के लिए फिलिस्तीनी जमीन पर इस 'कैंसर-रूपी' राष्ट्र का निर्माण किया, वे नरक की आग में जलें।"

इजरायल की कड़ी प्रतिक्रिया

इजरायल के विदेश मंत्री गिदोन सार ने भी इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाया. उन्होंने आसिफ के बयान को यहूदी-विरोधी बताते हुए कहा कि ऐसी भाषा शांति प्रक्रिया को नुकसान पहुंचाती है. उन्होंने यह भी कहा कि इजरायल अपने खिलाफ किसी भी खतरे से खुद की रक्षा करेगा और इस तरह के बयान उसके अस्तित्व पर हमला करने जैसे हैं.

मध्यस्थता पर उठे सवाल

यह पूरा विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत कराने में अहम भूमिका निभा रहा है. इस्लामाबाद में होने वाली इस बैठक को लेकर पहले ही काफी उम्मीदें थीं. हालांकि, इस नए विवाद ने पाकिस्तान की निष्पक्ष छवि पर असर डालने का खतरा पैदा कर दिया है. अगर यह स्थिति बनी रहती है, तो शांति प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है.

रिपोर्ट्स के अनुसार, लेबनान के प्रधानमंत्री नवाफ सलाम ने भी इजरायली हमलों को रोकने के लिए पाकिस्तान से मदद मांगी थी. इसके अलावा, ईरान का एक प्रतिनिधिमंडल भी इस्लामाबाद पहुंचने वाला है, जहां क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा होनी है. लेकिन मौजूदा हालात ने इन प्रयासों को और मुश्किल बना दिया है. ऐसे में यह देखना अहम होगा कि पाकिस्तान अपनी भूमिका को कैसे संतुलित करता है.

युद्धविराम पर भी दबाव

इस बीच, अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे अस्थायी युद्धविराम में भी तनाव के संकेत मिलने लगे हैं. खासतौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की सप्लाई प्रभावित होने के कारण हालात बिगड़ रहे हैं. अमेरिका ने ईरान पर आरोप लगाया है कि वह तेल के आवागमन को सुचारू रखने में विफल रहा है. वहीं, ईरान का कहना है कि लेबनान में जारी इजरायली हमले इस स्थिति के लिए जिम्मेदार हैं.

ट्रंप का बयान और बढ़ी चिंता

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस मुद्दे पर नाराजगी जताई. उन्होंने कहा कि ईरान समझौते के अनुसार काम नहीं कर रहा है. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि जल्द ही तेल की सप्लाई सामान्य हो सकती है, लेकिन आगे की योजना स्पष्ट नहीं की.

जमीनी स्तर पर हालात अभी भी सामान्य नहीं हैं. युद्धविराम के शुरुआती 24 घंटों में बहुत कम जहाज जलडमरूमध्य से गुजर पाए, जो सामान्य संख्या से काफी कम है. होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के लिए बेहद अहम मार्ग है, क्योंकि यहां से वैश्विक तेल और गैस की बड़ी आपूर्ति होती है. ऐसे में इस क्षेत्र में बढ़ता तनाव अंतरराष्ट्रीय बाजारों के लिए चिंता का विषय बन गया है.

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