अमेरिका-ईरान के बीच मध्यस्थता कर पाकिस्तान की हालत खराब, तेहरान के बाद चीन पहुंचे आसिम मुनीर और शहबाज शरीफ

अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता करने की कोशिश में पाकिस्तान बुरी तरह फंस गया है. न तो अमेरिका पाकिस्तान की बात मान रहा है और न ही ईरान आसिम मुनीर की अपील पर बातचीत के लिए तैयार हो रहा है.

Sonee Srivastav

नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता करने की कोशिश में पाकिस्तान बुरी तरह फंस गया है. न तो अमेरिका पाकिस्तान की बात सुन रहा है और न ही ईरान जनरल आसिम मुनीर और शहबाज शरीफ की अपील पर बातचीत के लिए तैयार हो रहा है. अब पाकिस्तान मदद मांगने चीन के पास पहुंच गया है.

चीन पहुंचे शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर

चीन की सरकारी मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर बीजिंग पहुंचे हैं. दोनों नेता चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और अन्य शीर्ष अधिकारियों से मुलाकात कर अमेरिका-ईरान विवाद का हल निकालने की कोशिश कर रहे हैं. यह दौरा इसलिए भी खास है क्योंकि इससे ठीक पहले आसिम मुनीर ईरान गए थे.

तेहरान में गुप्त बैठकें

बीजिंग जाने से पहले आसिम मुनीर पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी के साथ अचानक ईरान की राजधानी तेहरान पहुंचे. वहां उन्होंने ईरानी सैन्य अधिकारियों और शीर्ष नेताओं के साथ बंद कमरे में कई बैठकें की. पाकिस्तान और कतर द्वारा तैयार किए गए 30 दिनों के सीजफायर मसौदे पर ईरान की सहमति लेना इस दौरे का मुख्य मकसद था.

शहबाज शरीफ का बयान

चीन में बैठक के दौरान शहबाज शरीफ ने कहा कि पूरी दुनिया इस समय बहुत नाजुक मोड़ पर खड़ी है. उन्होंने कहा, “पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता में ईमानदारी से भूमिका निभाई है. फील्ड मार्शल आसिम मुनीर तेहरान में थे और वे इस चीन दौरे को भी छोड़ना नहीं चाहते थे.”शरीफ ने चीन का शुक्रिया अदा करते हुए कहा, “चीजें सही दिशा में बढ़ रही हैं. शांति स्थापित करने में चीन के सहयोग के लिए मैं उसका धन्यवाद करता हूं.”

चीन की पर्दे के पीछे भूमिका

चीन इस विवाद को सुलझाने में शुरुआत से ही सक्रिय है. पाकिस्तान ने पिछले महीने इस्लामाबाद में अमेरिका-ईरान के बीच बैठक भी बुलाई थी, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला. पहले 10 दिनों के सीजफायर में भी चीन ने ईरान को 20 से ज्यादा फोन कॉल करके मनाया था. अब पाकिस्तान चीन की मदद से फिर कोशिश कर रहा है.

भारत पर असर

अमेरिका और ईरान के बीच डील न हो पाने से तेल आपूर्ति पर संकट गहरा गया है. कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं. स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज अभी भी पूरी तरह नहीं खुल पाया है, जिससे भारत समेत कई देशों में चिंता बढ़ गई है. 

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