ट्विशा केस में जमानत पर घिरी गिरिबाला, सुप्रीम कोर्ट में उठे कई बड़े सवाल

सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इस पर संज्ञान लिया और सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली से लेकर मुख्य आरोपी के रसूखदार रवैये पर कई तीखे सवाल दागे.

Nidhi Jha
Edited By: Nidhi Jha

नई दिल्ली: मध्य प्रदेश के बहुचर्चित और बेहद संवेदनशील ट्विशा शर्मा संदिग्ध मौत मामले में देश की सर्वोच्च अदालत ने कड़ा रुख अख्तियार किया है. सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इस पर संज्ञान लिया और सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली से लेकर मुख्य आरोपी के रसूखदार रवैये पर कई तीखे सवाल दागे.

CBI की जांच क्यों जरूरी है

अदालत ने साफ किया कि मामले की तह तक जाने और दूध का दूध, पानी का पानी करने के लिए CBI द्वारा इसकी जांच किया जाना बेहद जरूरी है. इसके साथ ही कोर्ट ने दोनों पक्षों को मीडिया ट्रायल बंद करने की सख्त हिदायत दी है.

क्या स्थानीय स्तर पर जांच निष्पक्ष हो रही है?

सुप्रीम कोर्ट ने गहरी चिंता जताते हुए कहा कि आरोपी गिरिबाला सिंह के एक रिटायर्ड जज होने की वजह से समाज में यह नैरेटिव बन रहा है कि स्थानीय पुलिस की जांच निष्पक्ष नहीं हो पा रही है. कोर्ट ने सवाल उठाया कि इस माहौल में मामले की तह तक कैसे जाया जाए?

सीबीआई को सौंपने का फैसला

इस आशंका को दूर करने के लिए मामले की जांच तत्काल प्रभाव से सीबीआई को सौंपने के फैसले को रिकॉर्ड पर लिया गया. सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को आश्वस्त किया कि केंद्रीय एजेंसी आज से ही केस डायरी और जांच से जुड़े तमाम दस्तावेज अपने हाथ में ले लेगी ताकि बिना किसी बाधा के पूरी तरह निष्पक्ष जांच आगे बढ़ सके.

 इतनी जल्दी जमानत कैसे मिल गई 

पीठ ने इस बात पर हैरानी और तल्खी जताई कि इस गंभीर मामले में आरोपी को इतनी जल्दी जमानत कैसे मिल गई? साथ ही जांच की प्रगति पर भी सवाल किए. सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि आरोपी गिरिबाला सिंह जांच में बिल्कुल सहयोग नहीं कर रही हैं. वे अब तक आधिकारिक पूछताछ के लिए उपस्थित नहीं हुई हैं. जब जांच के सिलसिले में उनसे उनका मोबाइल फोन मांगा गया तो उन्होंने कई तरह की तकनीकी और प्रशासनिक अड़चनें खड़ी कर दीं.

 कॉल डिटेल्स कैसे लीक हो रही हैं?

कोर्ट ने इस बात को गंभीरता से लिया कि मामला संवेदनशील होने के बावजूद दोनों पक्षों की तरफ से सार्वजनिक मंचों पर लगातार बयान दिए जा रहे हैं. ट्विशा के वकील ने भी शिकायत की कि आरोपी पक्ष मीडिया में कॉल डिटेल्स जैसी गोपनीय जानकारियां साझा कर रहा है. सॉलिसिटर जनरल ने पुष्टि की कि आरोपी गिरिबाला सिंह पुलिस के सामने आने के बजाय लगातार अलग-अलग टीवी चैनलों को इंटरव्यू दे रही हैं.

ट्विशा को बदनाम करने की कोशिश

दिवंगत ट्विशा शर्मा को बदनाम करने की कोशिश कर रही हैं. इस पर चीफ जस्टिस ने सख्त हिदायत दी कि दोनों ही पक्ष तत्काल प्रभाव से मीडिया ट्रायल बंद करें. वे अपने बयान या शिकायतें किसी टीवी चैनल पर देने के बजाय सीधे सीबीआई के पास दर्ज कराएं.

 समाज के लिए अदालत का क्या दृष्टिकोण है?

चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि एक युवा बेटी को असमय खो देने पर परिवार को जिस असीम पीड़ा से गुजरना पड़ता है उसके प्रति अदालत की पूरी सहानुभूति है. इस मोड़ पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने समाज और परिवारों की सोच पर एक बड़ा प्रहार किया. उन्होंने कहा कि माता-पिता को सही वक्त पर अपनी बेटियों के हक के लिए खड़ा होना चाहिए.

बेटियों के लिए क्या सही है?

सामाजिक लोकलाज के डर से बेटियों को ससुराल में प्रताड़ना सहने के लिए नहीं छोड़ना चाहिए क्योंकि एक मृत बेटी होने से कहीं बेहतर और सुकूनदेह यह है कि बेटी तलाकशुदा होकर अपने मायके में सुरक्षित रहे.

 मुकदमे को मध्य प्रदेश से बाहर ट्रांसफर कर सकते है?

ट्विशा शर्मा के परिवार की ओर से पैरवी कर रहे कानूनी दल ने अंदेशा जताया कि राज्य के भीतर रसूखदारों के प्रभाव के कारण सुनवाई प्रभावित हो सकती है इसलिए क्या इस केस को राज्य से बाहर भेजा जा सकता है? चीफ जस्टिस ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि कानूनन इस पर कोई रोक नहीं है. पीड़ित परिवार के पास यह पूरा अधिकार है कि वे निष्पक्ष कानूनी लड़ाई के लिए किसी भी समय सुप्रीम कोर्ट में आधिकारिक ट्रांसफर याचिका दायर कर सकते हैं.

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