ट्विशा शर्मा केस की सुनवाई में भावुक हुए सॉलिसिटर जनरल, बोले 'मृत बेटी से बेहतर है तलाकशुदा बेटी'

घर से जवान बेटी की अर्थी उठती है तो सिर्फ एक शरीर नहीं शांत होता बल्कि उस मां-बाप के अरमान उनकी हंसती-खेलती दुनिया और उनके जीवन ही दफन हो जाता है.

Nidhi Jha
Edited By: Nidhi Jha

नई दिल्ली: जब एक घर से जवान बेटी की अर्थी उठती है तो सिर्फ एक शरीर नहीं शांत होता बल्कि उस मां-बाप के अरमान उनकी हंसती-खेलती दुनिया और उनके जीवन का सबसे खूबसूरत हिस्सा हमेशा के लिए दफन हो जाता है. भोपाल की 26 साल की उभरती हुई कलाकार ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत ने आज पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है. लेकिन इस दर्दनाक हादसे के बीच देश की सबसे बड़ी अदालत और कानूनी गलियारों से एक ऐसी बात सामने आई है.

समाज का डर

जिसने समाज के उस काले चेहरे को बेनकाब कर दिया है जहां बेटियां आज भी 'लोग क्या कहेंगे' के डर से घुट-घुट कर जीने को मजबूर हैं. मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में 26 वर्षीय एक्टर-मॉडल ट्विशा शर्मा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत का मामला अब देश की सर्वोच्च अदालत की सीधी निगरानी में है. अदालत ने स्पष्ट किया है कि वे इस संवेदनशील मामले की योग्यता पर कोई राय नहीं बना रहे हैंबल्कि उनका मकसद सिर्फ एक निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच सुनिश्चित करना है.

 बयानों की होड़ पर जताई गहरी चिंता

सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने मामले को लेकर टीवी चैनलों और समाचार पत्रों में चल रहे समानांतर विमर्श पर गहरी चिंता और पीड़ा व्यक्त की. कोर्ट ने कहा कि जांच को निष्पक्ष, स्वतंत्र और बिना किसी बाहरी प्रभाव के आगे बढ़ना चाहिए. शीर्ष अदालत ने सख्त लहजे में कहा कि दोनों पक्षों के परिवार और गवाह पब्लिक प्लेटफॉर्म पर अपनी बात रखने के बजाय सीधे जांच एजेंसी के सामने अपने बयान दर्ज कराएं, ताकि जारी जांच पर कोई प्रतिकूल असर न पड़े.

तलाक मंजूर है लेकिन बेटी की लाश नहीं

सुनवाई के दौरान जब अदालत का माहौल गंभीर था. तब देश के सॉलिसिटर जनरल ने समाज और हर माता-पिता की अंतरात्मा को झकझोरने वाली एक बेहद भावुक और गहरी टिप्पणी की. उन्होंने कहा एक बेटी का तलाकशुदा होकर घर वापस आ जाना, उसकी अर्थी उठने से कहीं बेहतर है. यह सिर्फ एक अदालती बयान नहीं है बल्कि यह हर उस बेबस मां-बाप के लिए एक सीख है जो अपनी बेटियों को विदा करते वक्त अनजाने में यह कह देते हैं कि 'अब वहीं से तुम्हारी डोली उठी है तो वहीं से अर्थी उठनी चाहिए. 

सीबीआई को सौंपी जा सकती है जांच

अदालत ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के उस आश्वासन को भी अपने रिकॉर्ड पर लिया जिसमें उन्होंने कहा कि इस मामले को CBI को सौंपने के संबंध में सरकार बहुत जल्द अंतिम निर्णय लेगी. रविवार को अपनी बेटी की अंत्येष्टि के बाद ट्विशा के पिता नवनिधि शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप का स्वागत किया. पीड़ित परिवार मामले की संवेदनशीलता और आरोपियों के रसूख को देखते हुए इस मुकदमे को मध्य प्रदेश से बाहर किसी अन्य राज्य में ट्रांसफर कराने की कानूनी तैयारी भी कर रहा है.

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