इजरायली सेना की धमकी, कहा- 'हिजबुल्लाह नहीं रुका तो लेबनान में घुसकर करेंगे कार्रवाई'
इजरायल-लेबनान सीमा पर हिजबुल्लाह के लगातार हमलों और सीजफायर उल्लंघनों के चलते तनाव फिर बढ़ गया है. इजरायल ने चेतावनी दी है कि अगर हमले नहीं रुके तो वह दोबारा लेबनान में सैन्य कार्रवाई कर सकता है.

नई दिल्ली: इजरायल और लेबनान की सीमा पर एक बार फिर तनाव तेजी से बढ़ता दिखाई दे रहा है. दोनों देशों के बीच शांति वार्ताओं की कोशिशें जारी हैं, लेकिन हालात अब भी बेहद संवेदनशील बने हुए हैं. इजरायली सैन्य अधिकारियों का कहना है कि हिजबुल्लाह की ओर से हमलों का खतरा लगातार बना हुआ है और सीमा पर स्थिति सामान्य होने के कोई संकेत फिलहाल नजर नहीं आ रहे. ऐसे में इजरायल ने संकेत दिए हैं कि यदि हमले नहीं रुके तो वह दोबारा लेबनान के अंदर सैन्य कार्रवाई कर सकता है.
27 मई के हमले से बढ़ा तनाव
हाल ही में 27 मई 2026 को गैलीली क्षेत्र में हुए एक हमले ने तनाव को और बढ़ा दिया. इस हमले में एक महिला इजरायली सैनिक की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य घायल बताए गए हैं. घटना के बाद सीमा से सटे इलाकों में रहने वाले लोगों के बीच डर और असुरक्षा का माहौल फिर गहरा गया है. स्थानीय निवासियों का कहना है कि सायरन और हमलों की चेतावनी अब उनकी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुकी है.
स्थिति तब और बिगड़ गई जब फरवरी 2026 में अमेरिका और इजरायल ने संयुक्त रूप से ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू की. रिपोर्ट्स के अनुसार, इस हमले में ईरान के कई वरिष्ठ अधिकारी मारे गए थे. इसके बाद ईरान समर्थित संगठन हिजबुल्लाह ने इजरायल के खिलाफ मिसाइल और ड्रोन हमले तेज कर दिए, जिससे लेबनान-इजरायल सीमा पर युद्ध जैसे हालात बन गए.
हालांकि अप्रैल 2026 में दोनों पक्षों के बीच अस्थायी युद्धविराम पर सहमति बनी थी, लेकिन इसके बावजूद लगातार संघर्ष जारी है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब तक 1500 से अधिक सीजफायर उल्लंघन दर्ज किए जा चुके हैं. इनमें रॉकेट हमले, ड्रोन गतिविधियां और सीमा पार घुसपैठ की घटनाएं शामिल हैं.
इजरायली सेना का दावा है कि उसने हिजबुल्लाह के कई ठिकानों और हथियार भंडारों को निशाना बनाया है. वहीं लेबनान की ओर से आरोप लगाया जा रहा है कि इजरायल लगातार हवाई सीमा का उल्लंघन कर रहा है. संयुक्त राष्ट्र की शांति सेना ने भी सीमा क्षेत्र में लगातार बढ़ते उल्लंघनों पर चिंता जताई है.
इजरायल की पूर्व सैन्य अधिकारी और सुरक्षा मामलों की विशेषज्ञ लेफ्टिनेंट कर्नल सारित जेहावी का कहना है कि केवल युद्धविराम की बातचीत से हालात नहीं बदलेंगे. उनका मानना है कि जब तक ईरान समर्थित संगठनों की फंडिंग और हथियारों की सप्लाई नहीं रोकी जाएगी, तब तक स्थायी शांति संभव नहीं है.
विशेषज्ञों का क्या मानना है?
विशेषज्ञों का मानना है कि सीमा पर बढ़ते तनाव और राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए आने वाले समय में हालात और गंभीर हो सकते हैं. इजरायल में आगामी चुनावों को भी इस सख्त रुख की एक बड़ी वजह माना जा रहा है. अब सबकी नजर इस बात पर है कि यह संघर्ष शांत होता है या क्षेत्र को एक बड़े युद्ध की ओर धकेल देता है.


