ईरान-अमेरिका डील पर बड़ा अपडेट, क्या है 28 लाख करोड़ के निवेश का माजरा?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान और अमेरिका के बीच अंतरिम परमाणु समझौते को लेकर बातचीत अंतिम चरण में पहुंच गई है, जिसमें अमेरिका ईरान में बड़े निवेश की तैयारी कर सकता है.

नई दिल्ली: ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से जारी तनाव के बीच एक नई कूटनीतिक हलचल सामने आई है. अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि दोनों देशों के बीच एक अंतरिम परमाणु समझौते को लेकर बातचीत निर्णायक दौर में पहुंच चुकी है. कहा जा रहा है कि अगर यह समझौता सफल होता है तो इससे न केवल मध्य पूर्व की राजनीति पर असर पड़ेगा, बल्कि वैश्विक तेल बाजार और क्षेत्रीय संबंधों में भी बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है.
28 लाख करोड़ रुपये का निवेश
रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रस्तावित समझौते के तहत अमेरिका ईरान में लगभग 300 अरब डॉलर यानी करीब 28 लाख करोड़ रुपये का निवेश कर सकता है. यह निवेश मुख्य रूप से तेल, गैस और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में किए जाने की संभावना जताई जा रही है. माना जा रहा है कि इससे ईरान की कमजोर पड़ चुकी अर्थव्यवस्था को बड़ी राहत मिल सकती है, जो लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का सामना कर रही है.
सूत्रों के मुताबिक, इस तरह के निवेश का प्रस्ताव पहले ओमान में हुई बातचीत के दौरान भी चर्चा में आया था. ईरान की कोशिश है कि विदेशी पूंजी के जरिए उसकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो और प्रतिबंधों के असर को कम किया जा सके.
इस पूरे घटनाक्रम में पाकिस्तान की संभावित भूमिका को भी अहम बताया जा रहा है. कुछ सऊदी मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि प्रस्तावित अंतरिम समझौते में पाकिस्तान को गारंटर देश के तौर पर शामिल किया जा सकता है. माना जा रहा है कि पाकिस्तान दोनों देशों के बीच भरोसे का माहौल बनाने में भूमिका निभा सकता है. हालांकि अभी तक इस संबंध में ईरान, अमेरिका या पाकिस्तान की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है.
रिपोर्ट्स में क्या कहा गया?
रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि समझौते के तहत ईरान 30 दिनों के भीतर होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह खोलने पर सहमत हो सकता है. होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्गों में से एक है, जहां से हर दिन बड़ी मात्रा में कच्चे तेल की सप्लाई होती है. समझौते के अनुसार, इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर अतिरिक्त प्रतिबंध या शुल्क नहीं लगाया जाएगा.
इसके बदले ईरान को उसके कुछ जब्त फंड वापस मिलने की संभावना जताई जा रही है, जो कथित तौर पर कतर में रखे गए हैं. साथ ही, ईरान ने परमाणु हथियार नहीं बनाने का भरोसा भी दिया है. हालांकि संवर्धित यूरेनियम को लेकर अंतिम निर्णय अभी बाकी बताया जा रहा है.
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह समझौता सफल होता है, तो इससे मध्य पूर्व में तनाव कम हो सकता है और अंतरराष्ट्रीय बाजारों को भी स्थिरता मिल सकती है. वहीं पाकिस्तान की संभावित भागीदारी ने इस पूरे मामले को और अधिक चर्चा का विषय बना दिया है.


