'अगर मेरा बेटा क्रिमिनल है तो?' TMC में बगावत! ममता-अभिषेक को हटाने की खुली मांग

अब नाराजगी टॉप लीडरशिप तक पहुंच गई है और इस्तीफों की मांग तेज हो गई है। कोलकाता नगर निगम के तृणमूल पार्षद और मेयर पार्षद तारक सिंह ने सीधे लीडरशिप बदलने की मांग कर दी है।

Sachin Hari Legha

कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की हार के बाद से पार्टी के अंदर असंतोष लगातार बढ़ रहा है। सांसद काकली घोष दस्तिदार, डॉ. शांतनु सेन, जवाहर सरकार, अरूप चक्रवर्ती और सुशांत घोष जैसे नेताओं ने पिछले दो दिनों में पार्टी के पद छोड़कर खुलकर बयान दिए हैं।

अब नाराजगी टॉप लीडरशिप तक पहुंच गई है और इस्तीफों की मांग तेज हो गई है। कोलकाता नगर निगम के तृणमूल पार्षद और मेयर पार्षद तारक सिंह ने सीधे लीडरशिप बदलने की मांग कर दी है।

क्या ममता बनर्जी को बदलना चाहिए? ‘हां, बिल्कुल’   

टीएमसी की लीडरशिप बदलने के सवाल पर पार्टी के वरिष्ठ नेता ने मीडिया से कहा, 'हम उन्हें बदलना चाहते हैं जो लीड कर रहे हैं।' जब उनसे पूछा गया कि क्या उनका इशारा ममता बनर्जी की तरफ है, तो उन्होंने साफ कहा, 'हां, बिल्कुल।'

उन्होंने आगे कहा, 'पार्टी किसी की पुश्तैनी जायदाद नहीं है। हम लीडरशिप में बदलाव चाहते हैं। मैं चाहता हूं। मैं आपको खुलकर बता रहा हूं। हम तृणमूल कांग्रेस की लीडरशिप में बदलाव चाहते हैं।'

अभिषेक बनर्जी पर भी साधा निशाना   

तारक सिंह ने अभिषेक बनर्जी पर भी हमला बोला। बिना नाम लिए उन्होंने कहा, 'अगर मेरा बेटा क्रिमिनल हुआ तो मैं राज नहीं करूंगा।' वहीं तृणमूल नेता बिस्वजीत देब ने चुनाव में हार और भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर ममता और अभिषेक पर सीधा हमला किया। उन्होंने आरोप लगाया, 'ममता और अभिषेक की जानकारी के बिना पार्टी के लोग ऐसा भ्रष्टाचार नहीं कर सकते हैं।'

टीएमसी में इस्तीफों की झड़ी   

कई इस्तीफों से साफ है कि पार्टी के अंदर गुस्सा बढ़ रहा है। तृणमूल पार्षद सुशांत घोष ने बुधवार को बरो चेयरमैन पद से इस्तीफा दे दिया। उसी दिन पार्षद अरूप चक्रवर्ती ने भी म्युनिसिपल अकाउंट्स कमेटी की सदस्यता छोड़ दी।

इस्तीफा देने वाले सुशांत घोष ने कहा, 'मैं तृणमूल से निराश हूं। लगता है पार्टी कहीं अपना रास्ता भटक गई है।' अरूप चक्रवर्ती ने कहा, 'पार्टी लीडरशिप कहां है? हमें वह लीडरशिप नहीं मिली जो ममता बनर्जी देती रहीं।'

बागियों की लिस्ट में शांतनु सेन भी शामिल   

पूर्व तृणमूल सांसद शांतनु सेन भी बुधवार को बागियों की लिस्ट में शामिल हो गए। उन्होंने कहा, 'बंगाल के लोगों ने 4 मई 2026 को भारी बहुमत से साफ कर दिया था कि उन्होंने नौकरी की चोरी, आरजी टैक्स स्कैंडल, अभया स्कैंडल समेत अलग-अलग क्षेत्रों में फैले भ्रष्टाचार के खिलाफ फैसला दिया है।'

सांसदों के बीच खुला टकराव   

गौरतलब है कि पार्टी के दो वरिष्ठ सांसद कल्याण बनर्जी और काकली घोष दस्तीदार के बीच खुले टकराव ने भी तृणमूल की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। काकली ने लोकसभा स्पीकर को चिट्ठी लिखकर कल्याण बनर्जी के खिलाफ शिकायत की है।

काकली ने आरोप लगाया, 'हाल ही में एक सांसद के तौर पर, मुझे महिला एमपी पर पुरुषवादी नजरिए से हमला करना सही नहीं लगा।' जवाब में कल्याण बनर्जी ने कहा, 'तो अगर मैंने उन्हें बताया, तो कब बताया? और कब बताऊंगा, उनकी अटेंडेंस इतनी कम है, मैं कहां और किसे बताऊंगा? वह कहां हैं? वह सदन में नहीं होते।'

लीडरशिप से नाराजगी, लगातार इस्तीफे और अंदरूनी झगड़ों ने तृणमूल कांग्रेस पर दबाव बढ़ा दिया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पार्टी के अंदर यह गुस्सा आने वाले दिनों में और बड़ा रूप ले सकता है।

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