रूस के खतरे पर ब्रिटेन का खुला एलान, यूरोप को अब लड़ने के लिए तैयार रहना होगा
म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने यूरोप को चेताया। उन्होंने कहा कि रूस के खतरे को हल्के में न लें। यूरोप को खुद अपनी सुरक्षा के लिए तैयार रहना होगा।

म्यूनिख में दुनिया के बड़े नेता जुटे थे।यहीं ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने साफ शब्दों में बात कही।उन्होंने कहा कि रूस का इरादा कमजोर नहीं पड़ा है।यूक्रेन युद्ध के बाद हालात बदले हैं।लेकिन खतरा खत्म नहीं हुआ है।स्टारमर ने कहा कि यूरोप को खुद खड़ा होना होगा।अब दूसरों पर निर्भर रहने का वक्त नहीं है।
क्या रूस फिर तैयारी में?
स्टारमर ने कहा कि अगर यूक्रेन में कभी शांति समझौता हुआ भी।तो रूस अपनी सेना फिर मजबूत कर सकता है।उन्होंने इसे हल्का खतरा नहीं माना।उनका कहना था कि रूस ने आक्रामकता दिखाई है।ऐसे में ढिलाई नहीं चल सकती।यूरोप को पहले से तैयारी रखनी होगी।जरूरत पड़े तो मुकाबले के लिए भी तैयार रहना होगा।
क्या नाटो की कसौटी पास होगी?
ब्रिटेन ने नाटो के अनुच्छेद 5 की दोबारा पुष्टि की।इस नियम के तहत एक देश पर हमला, सभी पर हमला माना जाता है।स्टारमर ने कहा कि ब्रिटेन की प्रतिबद्धता मजबूत है।उन्होंने यह भी इशारा किया कि कुछ समय पहले डोनाल्ड ट्रंप ने यूरोपीय देशों की जिम्मेदारी पर सवाल उठाए थे।लेकिन अब यूरोप को खुद जवाब देना होगा।
क्या आर्कटिक में बढ़ेगी तैनाती?
स्टारमर ने एक और बड़ा ऐलान किया।ब्रिटेन अपना कैरियर स्ट्राइक ग्रुप आर्कटिक और हाई नॉर्थ इलाके में भेजेगा।यह कदम रूस की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए है।इस मिशन में अमेरिका, कनाडा और अन्य नाटो देश भी शामिल होंगे।यह सिर्फ बयान नहीं, कार्रवाई का संकेत है।यानी समुद्र और बर्फीले इलाके में भी ताकत दिखाई जाएगी।
क्या ब्रेक्सिट पर बदले सुर?
स्टारमर ने यूरोपियन यूनियन के साथ रिश्तों की बात भी की।उन्होंने कहा कि 2020 के बाद बना मौजूदा ढांचा सही नहीं है।ब्रेक्सिट के बाद दूरी बढ़ी है।अब समय है आर्थिक तालमेल बढ़ाने का।उन्होंने माना कि इसमें समझौते भी करने होंगे।लेकिन मजबूत अर्थव्यवस्था ही रक्षा खर्च बढ़ा सकती है।
क्या घरेलू दबाव कम हुआ?
यह भाषण ऐसे वक्त आया जब स्टारमर घर में दबाव झेल रहे थे।कुछ नेताओं ने उनके फैसलों पर सवाल उठाए थे।पीटर मंडेलसन की नियुक्ति पर विवाद हुआ।कुछ ने इस्तीफे की मांग भी की।लेकिन स्टारमर ने कहा कि हफ्ता खत्म होते-होते वह और मजबूत होकर निकले हैं।मंच से उनका आत्मविश्वास साफ दिखा।
क्या यूरोप नई दिशा में?
म्यूनिख से दिया गया संदेश साफ है।यूरोप अब सुरक्षा पर ज्यादा खर्च करेगा।रूस को खुली चेतावनी दी गई है।नाटो की एकता दोहराई गई है।ब्रिटेन खुद आगे आना चाहता है।सवाल है, क्या बाकी देश भी उतनी ही तेजी दिखाएंगे।आने वाले महीनों में इसका जवाब मिलेगा।


