ईरान-अमेरिका डील से बाहर पाकिस्तान, नए मुस्लिम देश की एंट्री से बदला पूरा समीकरण

कूटनीतिक हलचल के बीच सबसे चौंकाने वाली खबर यह है कि कतर की राजधानी दोहा में अमेरिका और ईरान के बीच एक बेहद गोपनीय और निर्णायक बातचीत शुरू हो चुकी है. विरोधी देश कई पेचीदा मुद्दों पर एक साझा समझौते के बेहद करीब पहुंच चुके हैं.

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नई दिल्ली: मिडल ईस्ट में जारी भारी तनाव को कम करने के लिए कतर की राजधानी दोहा में अमेरिका और ईरान के बीच एक बेहद गोपनीय और निर्णायक बातचीत शुरू हो चुकी है. क्षेत्रीय मीडिया और अंतरराष्ट्रीय हलकों से आ रही खबरों के मुताबिक दोनों धुर विरोधी देश कई पेचीदा मुद्दों पर एक साझा समझौते के बेहद करीब पहुंच चुके हैं.

पाकिस्तान का पत्ता साफ

इस बड़ी कूटनीतिक हलचल के बीच सबसे चौंकाने वाली खबर यह है कि इस पूरी वार्ता प्रक्रिया से पाकिस्तान का पत्ता पूरी तरह साफ हो गया है. कभी इस बातचीत की कमान संभालने वाला पाकिस्तान अब तमाशाबीन बन चुका है जबकि खाड़ी के छोटे लेकिन आर्थिक रूप से बेहद प्रभावशाली देश 'कतर' ने मिडिएटर के रूप में बाजी मार ली है. इसके साथ ही, वैश्विक मंच पर जंग रोकने का बड़ा मेडल जीतने का पाकिस्तान का सपना भी चकनाचूर हो गया है.

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और तेल संकट पर बनी सहमति

अंतरराष्ट्रीय मीडिया नेटवर्क 'अल जजीरा' की रिपोर्ट के अनुसार कतर की कुशल मध्यस्थता के चलते दोनों देशों के बीच विदेशों में फ्रीज पड़े ईरानी एसेट्स को लेकर शुरुआती सहमति बन गई है. दोहा में चल रही इस बातचीत में ईरान की ओर से उसके संसद अध्यक्ष मोहम्मद बघेर कालिबाफ, विदेश मंत्री अब्बास अरागची और केंद्रीय बैंक के प्रमुख अब्दोलनासेर हेम्मती खुद शामिल हैं. इतनी उच्च स्तरीय भागीदारी से साफ है कि तेहरान इस समझौते को लेकर बेहद गंभीर है.

नए सिरे से बातचीत शुरू

इस वार्ता का सबसे मुख्य एजेंडा वैश्विक अर्थव्यवस्था की लाइफलाइन कहा जाने वाला 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' समुद्री मार्ग है जहां से दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत कच्चा तेल गुजरता है. सूत्रों के मुताबिक प्रस्तावित शांति समझौते के ड्राफ्ट में 60 दिनों का पूर्ण युद्धविराम, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही बहाल करना ईरानी तेल निर्यात पर लगी पाबंदियों में ढील देना और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर नए सिरे से बातचीत शुरू करना शामिल है.

आखिर क्यों बाहर हुआ पाकिस्तान?

इस पूरी कूटनीतिक कहानी का सबसे दिलचस्प पहलू मध्यस्थों का बदलना है. शुरुआत में अमेरिका और ईरान को एक मेज पर लाने का जिम्मा पाकिस्तान और तुर्की ने संयुक्त रूप से उठाया था. पाकिस्तान ने पहले दौर की औपचारिक बातचीत इस्लामाबाद में आयोजित भी कराई थी, लेकिन वह बेनतीजा रही। इसके बाद जब दूसरे दौर की कोशिशें शुरू हुई तो इस्लामाबाद की कूटनीतिक विफलता के कारण दोनों देश आमने-सामने बैठने को भी तैयार नहीं हुए.

ईरान ने पाकिस्तान पर लगाया आरोप

परदे के पीछे की हकीकत यह रही कि ईरान ने पाकिस्तान पर यह गंभीर आरोप लगाया कि वह मध्यस्थता के नाम पर अमेरिकी हितों की वकालत कर रहा है. वाशिंगटन को भी पाकिस्तान की मंशा पर गहरा संदेह था. दोनों पक्षों से विश्वास खोने के बाद पाकिस्तान को इस रेस से बाहर होना पड़ा और कतर ने इस खाली जगह को बखूबी भर दिया. फिलहाल वाशिंगटन और तेहरान ने आधिकारिक तौर पर समझौते पर मुहर नहीं लगाई है लेकिन दोहा में जारी इस बैठक पर इस समय पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं. First Updated : Tuesday, 26 May 2026

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