नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास पैदा हुए सुरक्षा संकट के बीच फ्रांस ने भारत को एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा अभियान में शामिल होने का प्रस्ताव दिया है. माना जा रहा है कि इस विषय पर कनाडा में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के बीच होने वाली द्विपक्षीय वार्ता में विस्तार से चर्चा होगी.
जानकारी के अनुसार, फ्रांस अपने सहयोगी देशों के साथ मिलकर होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने और समुद्री मार्गों की सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए एक बहुराष्ट्रीय ढांचे पर काम कर रहा है. इस पहल का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय व्यापार, विशेष रूप से ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े समुद्री मार्गों को किसी भी तरह के खतरे से सुरक्षित रखना है. होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का प्रमुख मार्ग माना जाता है, जहां से दुनिया के ऊर्जा व्यापार का बड़ा हिस्सा गुजरता है.
रिपोर्टों के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों की बैठक में रक्षा सहयोग, रणनीतिक साझेदारी, समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय भू-राजनीतिक हालात प्रमुख एजेंडे में शामिल रहेंगे. पश्चिम एशिया में हाल के महीनों के दौरान ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़े तनाव ने पूरे क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावित किया है, जिसका असर वैश्विक व्यापार और ऊर्जा बाजारों पर भी पड़ रहा है.
जी-7 सम्मेलन के दौरान पश्चिम एशिया की स्थिति पर केंद्रित एक अलग बैठक भी प्रस्तावित है. इसमें भारत, अमेरिका, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात सहित कई देशों के नेताओं के शामिल होने की संभावना है. इस बैठक में क्षेत्रीय स्थिरता, ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला और समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा जैसे विषयों पर चर्चा हो सकती है.
विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने प्रधानमंत्री मोदी की फ्रांस और स्लोवाकिया यात्रा के संबंध में जानकारी देते हुए कहा कि मोदी और मैक्रों की वार्ता में पश्चिम एशिया समेत विभिन्न वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर विचार-विमर्श किया जाएगा. उन्होंने यह भी संकेत दिया कि हाल के समय में विभिन्न देशों द्वारा शुरू की गई नई रणनीतिक पहलों पर भी चर्चा संभव है.
फ्रांसीसी अधिकारियों का मानना है कि समुद्री मार्गों की सुरक्षा केवल क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक आवश्यकता है. उनका कहना है कि फ्रांस किसी सैन्य संघर्ष का हिस्सा नहीं है, लेकिन खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता का प्रभाव पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है. इसलिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से समुद्री सुरक्षा को और मजबूत बनाना जरूरी है.
फ्रांस ने भारत को अपना विश्वसनीय और प्रमुख रणनीतिक साझेदार बताते हुए दोनों देशों के बीच मजबूत सहयोग और पारस्परिक विश्वास पर जोर दिया है. साथ ही यह भी माना जा रहा है कि 14 से 16 जून के बीच होने वाली प्रधानमंत्री मोदी की स्लोवाकिया यात्रा के दौरान रक्षा क्षेत्र से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण समझौतों या घोषणाओं की भी संभावना है. First Updated : Friday, 12 June 2026