ईरान पर हमले का असली मास्टरमाइंड कौन? ट्रंप के पास आता था इस मुस्लिम दोस्त का प्राइवेट कॉल
ईरान में हुए हमले में खामेनेई की मौत ने सभी को हैरान कर दिया है. सभी को यही लगता है कि इस हमले का असली मास्टरमाइंड राष्ट्रपति ट्रंप है, लेकिन ऐसा बिलकुल भी नहीं है. उनके साथ इजरायल और एक मुस्लिम दोस्त है, जिसने उन्हें यह हमला करने पर जोर दिया.

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बड़ा हंगामा मच गया जब अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान पर हमला किया. इस हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई. तेहरान की सरकारी मीडिया ने इसकी पुष्टि की और कई लोग भावुक हो गए. 86 साल के खामेनेई करीब 40 साल से ईरान की सत्ता संभाल रहे थे.
अब बड़ा सवाल ये है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इतना जोखिम वाला कदम क्यों उठाया, जबकि अमेरिकी जासूसी एजेंसियों ने कहा था कि ईरान से कोई फौरन खतरा नहीं है.
हमले की क्या है वजह?
यह हमला अमेरिका और इजरायल की साझा योजना से हुआ. जिसका नाम रखा गया 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी'. साथ ही इस हमले का निशाना था तेहरान में खामेनेई का घर और ऑफिस.
ईरानी न्यूज एजेंसियों तसनीम और फार्स ने बताया कि हमले में खामेनेई के साथ उनकी बेटी, दामाद, पोती और बहू भी मारी गई. ईरान में 40 दिनों का राजकीय शोक और 7 दिनों की छुट्टी घोषित की गई. इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कोर ने कहा कि देश ने एक बड़ा नेता खो दिया है.
ट्रंप पर किसने बनाया दबाव?
रिपोर्ट्स बताती हैं कि ट्रंप पर हमले के लिए उनके क्षेत्रीय दोस्तों ने काफी जोर लगाया. एक बड़े मुस्लिम देश ने कहा कि ईरान के खिलाफ कार्रवाई का इससे अच्छा समय नहीं मिलेगा. पिछले एक महीने में ट्रंप के पास कई निजी फोन कॉल आए. ये कॉल सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से थे.
सऊदी अरब बाहर से शांति की बात करता रहा, लेकिन अंदर से ईरान के खिलाफ सख्त कदम की सिफारिश की जा रही थी. इजरायल भी इस दबाव में शामिल था.
गुप्त बातचीत का राज
ट्रंप और मोहम्मद बिन सलमान की ये फोन कॉल्स बहुत गोपनीय थी. ये आधिकारिक मीटिंग से अलग रखी गई. मीडिया को इनकी भनक तक नहीं लगी और अमेरिकी अफसरों को भी पूरी जानकारी नहीं दी गई.
बाहर कूटनीति चल रही थी, लेकिन बंद दरवाजों के पीछे सैन्य हमले की योजना बन रही थी. सूत्रों का मानना है कि यही गुप्त चर्चाएं आखिरकार हमले का आधार बनी, जिससे पूरा इलाका युद्ध के कगार पर आ गया.
इजरायल की भूमिका
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू लंबे समय से ईरान के परमाणु कार्यक्रम और नेताओं के खिलाफ कार्रवाई मांग रहे थे. उन्होंने ट्रंप को मनाया कि तेहरान का असर कम करने का यही मौका है. अमेरिका और इजरायल ने मिलकर हमला किया.
आलोचक पूछ रहे हैं कि जब अमेरिकी इंटेलिजेंस ने खतरा नकारा था, तो फिर इतना बड़ा कदम क्यों? लेकिन सहयोगियों ने ट्रंप को समझाया कि यह ईरान को कमजोर करने का सही वक्त है.
खामेनेई को लेकर ट्रंप का बयान
ट्रंप ने अपने प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि खामेनेई जैसे निर्दयी नेता का अंत न्यायपूर्ण है. उन्होंने ईरानी लोगों से अपील की कि वे अपना शासन बदलें और यह मौका पीढ़ियों में एक बार आता है. ट्रंप का दावा है कि यह कदम ईरानी जनता की आजादी के लिए उठाया गया. लेकिन अब देखना है कि इस हमले से क्षेत्र में क्या बदलाव आते हैं.


