पाकिस्तान पर पड़ रही दोहरी मार, कंगाली के बीच तेल की महंगाई ने लगाई आग, जानिए पूरा मामला

पाकिस्तान के अर्थव्यवस्था कमजोर होती जा रही है. मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के कारण तेल की कीमतें बढ़ने से पाकिस्तान में मुद्रास्फीति दोहरे अंकों में बनी रह सकती है.

Sonee Srivastav

इस्लामाबाद: पाकिस्तान की कमजोर अर्थव्यवस्था पर वैश्विक तेल संकट का गहरा असर पड़ रहा है. मध्य पूर्व में चल रहे संकट के कारण तेल की कीमतें बढ़ने से पाकिस्तान में मुद्रास्फीति दोहरे अंकों में बनी रह सकती है. टॉपलाइन सिक्योरिटीज की हालिया रिपोर्ट में इस स्थिति को "लंबा और बदलता हुआ" बताया गया है. रिपोर्ट के अनुसार, शांति स्थापित होने तक सुधार की उम्मीद कम है.

महंगाई और विकास दर पर बुरा प्रभाव

रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि अगले साल औसत मुद्रास्फीति 9 से 10 प्रतिशत रह सकती है. अगर तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल पर बनी रही तो चालू वित्त वर्ष की आखिरी तिमाही में यह 11 प्रतिशत से ऊपर जा सकती है. हर 10 डॉलर की बढ़ोतरी से मुद्रास्फीति में 50 आधार अंक की वृद्धि हो सकती है. अगर कीमतें 120 डॉलर तक पहुंच गई तो मुद्रास्फीति 11 प्रतिशत तक पहुंच सकती है.

इससे स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान को ब्याज दरें और बढ़ानी पड़ सकती हैं. बढ़ती महंगाई आर्थिक विकास को भी धीमा कर रही है. टॉपलाइन सिक्योरिटीज ने FY27 के लिए जीडीपी विकास का अनुमान घटाकर 2.5 से 3.0 प्रतिशत कर दिया है, जो पहले 4 प्रतिशत था. FY26 में विकास 3.5 से 4.0 प्रतिशत रह सकता है, लेकिन औद्योगिक क्षेत्र में यह सिर्फ 1 प्रतिशत तक सिमट सकता है.

ऊर्जा आयात पर भारी निर्भर

तापाकिस्तान अपनी 85 प्रतिशत ऊर्जा जरूरतें आयात से पूरी करता है. FY26 में पेट्रोलियम आयात 15 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है. इसी वजह से पाकिस्तान स्टॉक एक्सचेंज दुनिया के सबसे खराब प्रदर्शन वाले बाजारों में शामिल रहा. इस साल की पहली तिमाही में बाजार 15 प्रतिशत गिर चुका है.

भारत से तुलना में ऊर्जा सुरक्षा की चिंता

पाकिस्तान अब अपनी ईंधन कमजोरी को स्वीकार कर रहा है. ऊर्जा सुरक्षा के मामले में भारत की स्थिति काफी बेहतर बताई जा रही है. भारत ने नवीकरणीय ऊर्जा, घरेलू उत्पादन और विविध आयात स्रोतों पर जोर देकर अपनी निर्भरता कम की है. वहीं पाकिस्तान अभी भी आयातित तेल और गैस पर ज्यादा निर्भर है, जिससे उसकी अर्थव्यवस्था ज्यादा प्रभावित हो रही है.

चालू खाता घाटा और रुपये पर दबाव

रिपोर्ट के मुताबिक, अगर आयात पर सख्ती नहीं बरती गई तो FY27 में चालू खाता घाटा 8 अरब डॉलर से ज्यादा हो सकता है. विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ेगा. राजकोषीय घाटा FY26 में जीडीपी का 4.0 से 4.5 प्रतिशत रह सकता है.

रेमिटेंस में 3.5 प्रतिशत की गिरावट आने की आशंका है, खासकर खाड़ी देशों से 10 प्रतिशत कम आवक होने की उम्मीद है. निर्यात में भी 4 प्रतिशत की कमी आ सकती है.

घरेलू उत्पादन की उम्मीद

FY27 तक पाकिस्तानी रुपया डॉलर के मुकाबले 298 तक कमजोर हो सकता है. घरेलू खोज कंपनियां भविष्य में उत्पादन बढ़ाकर एलएनजी आयात कम करने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन निकट भविष्य में उच्च ब्याज दरें, यूरिया की महंगाई और आपातकालीन प्रशासनिक कदमों पर निर्भरता बनी रहेगी.

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