नई दिल्ली: होर्मुज जलमार्ग बंद होने से दुनिया भर की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ा है। इसका सबसे बुरा प्रभाव भारत के पड़ोसी पाकिस्तान पर दिख रहा है। तेल और गैस की सप्लाई रुकने से वहां हालात बद से बदतर हो गए हैं। अब भारत और दूसरे देशों से सीख लेते हुए पाकिस्तान ने भी कच्चे तेल और रिफाइंड प्रोडक्ट्स के लिए स्टोरेज सिस्टम बनाने का प्लान तैयार किया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पाकिस्तान तेल और एलएनजी की सप्लाई के लिए 90% तक होर्मुज जलमार्ग पर निर्भर है। उसके पास कोई रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व भी नहीं है।
पश्चिम एशिया में तनाव के कारण उसे भयंकर आपूर्ति संकट झेलना पड़ रहा है। ऊपर से IMF के लोन प्रोग्राम की शर्तों के चलते पाकिस्तान सरकार के पास खर्च करने की ज्यादा आजादी भी नहीं बची है।
रॉयटर्स द्वारा देखे गए दस्तावेजों के मुताबिक, पाकिस्तान के ऊर्जा मंत्रालय ने सरकारी और निजी दोनों स्तर पर तेल भंडारण क्षमता बढ़ाने की योजना बनाई है। पाकिस्तान ने इस प्लान को सऊदी अरामको, अबू धाबी नेशनल ऑयल कॉर्प, कुवैत पेट्रोलियम कॉर्प, कतर एनर्जी और पेट्रोचाइना जैसी बड़ी कंपनियों के साथ शेयर किया है। इसके अलावा विटोल, ट्राफिगुरा और स्टोरेज ऑपरेटर वोपाक जैसी तेल व्यापार फर्मों को भी जानकारी दी गई है।
पाकिस्तान सरकार अब तेल और गैस की घरेलू खोज और उत्पादन बढ़ाने पर जोर दे रही है। वह अपनी रिफाइनरियों को भारत की तर्ज पर आधुनिक बनाना चाहती है। साथ ही तेल बेचने और वितरण के सिस्टम को भी बेहतर करने की तैयारी है। ऊर्जा मंत्रालय का कहना है कि देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए आपातकालीन तेल भंडार के साथ-साथ घरेलू सप्लाई और उत्पादन की मजबूत क्षमता होना जरूरी है।
गौरतलब है कि होर्मुज संकट ने पाकिस्तान को बता दिया कि एक ही रास्ते पर निर्भर रहना कितना खतरनाक हो सकता है। अब वह चाहता है कि भविष्य में ऐसी बुरी स्थिति दोबारा न आए। इसलिए रणनीतिक रिजर्व बनाने के साथ-साथ घरेलू उत्पादन बढ़ाने पर काम शुरू कर दिया गया है। हालांकि पैसे की कमी और IMF की शर्तें उसके लिए बड़ी चुनौती हैं। First Updated : Tuesday, 26 May 2026