पाकिस्तान में नए बंटवारे की सियासी उथल-पुथल, 16 प्रांतों की मांग ने सत्ता से लेकर सड़कों तक मचा दी हलचल

पाकिस्तान में चार राज्यों को सोलह में बदलने की मांग ने वहां की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है और यह प्रस्ताव सीधे देश की स्थिरता से जुड़ गया है।

Lalit Sharma
Edited By: Lalit Sharma

पाकिस्तान अभी सिर्फ चार प्रांतों वाला देश है।पंजाब सिंध बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा मिलकर पूरा ढांचा बनाते हैं।लेकिन अब इस व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।कहा जा रहा है कि इतनी बड़ी आबादी को चार हिस्सों से चलाना मुश्किल है।सरकार तक लोगों की पहुंच नहीं हो पा रही।इसी सोच से नया प्रस्ताव निकला है।चार की जगह सोलह प्रांत बनाने की बात सामने आई है।

यह बड़ा प्रस्ताव किसने रखा?

इस्तेहकाम पाकिस्तान पार्टी ने यह मांग उठाई है।पार्टी के नेता और संचार मंत्री अब्दुल कलीम खान इसके चेहरे हैं।उन्होंने कहा कि देश को छोटे प्रशासनिक हिस्सों में बांटना जरूरी है।उनका मानना है कि इससे जनता को सेवाएं जल्दी मिलेंगी।उन्होंने अपनी पार्टी की बैठक में आंदोलन का ऐलान भी किया।यह सिर्फ सुझाव नहीं बल्कि राजनीतिक लड़ाई बनने जा रही है।पाकिस्तान की सियासत में इससे हलचल बढ़ गई है।

सोलह प्रांत कैसे बनाए जाएंगे?

कलीम खान ने इसके लिए एक ढांचा भी बताया है।उन्होंने कहा कि पुराने प्रांतों के नाम नहीं बदलेंगे।पंजाब को उत्तर दक्षिण पूर्व और पश्चिम में बांटा जा सकता है।इसी तरह सिंध बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा को भी चार चार हिस्सों में किया जा सकता है।इससे प्रशासन छोटे इलाके तक पहुंचेगा।लोगों को पहचान और सुविधा दोनों मिलेगी।उनका कहना है कि यह देश के हित में होगा।

क्या दूसरी पार्टियां भी साथ आईं?

इस प्रस्ताव को सिंध की बड़ी पार्टी एमक्यूएम का समर्थन मिल गया है।एमक्यूएम का मानना है कि छोटे प्रांत से अधिकार नीचे तक आएंगे।कलीम खान ने सभी दलों से एकजुट होने की अपील की है।उन्होंने कहा कि इसे छोटी राजनीति से ऊपर रख कर देखना चाहिए।पाकिस्तान का भविष्य इससे जुड़ा है।अगर सहमति बनती है तो संविधान में बदलाव होगा।यह एक बड़ा राजनीतिक मोड़ साबित हो सकता है।

हिंसाग्रस्त इलाकों से इसका क्या रिश्ता है?

बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा लंबे समय से अशांत हैं।यहां सरकार विरोधी गुस्सा बहुत गहरा है।पंजाबियों को निशाना बनाकर कई हमले हो चुके हैं।स्थानीय लोग खुद को अलग थलग महसूस करते हैं।छोटे प्रांत से उन्हें अपनी सरकार मिलेगी।ऐसा मानने वाले कहते हैं कि इससे विद्रोह कम होगा।यह प्रस्ताव शांति की एक कोशिश भी माना जा रहा है।

सड़क और विकास की बातें क्यों जुड़ीं?

कलीम खान ने सिर्फ प्रांतों की बात नहीं की।उन्होंने रोड नेटवर्क को भी बेहतर करने का सुझाव दिया।लाहौर से सियालकोट और खारियां तक नई सड़क की बात रखी गई।कामोके और गुजरांवाला को जोड़ने की योजना भी सामने आई।उन्होंने छह लेन की चौड़ी सड़क की मांग की।उनका कहना है कि विकास और प्रशासन साथ चलेंगे।यही नए पाकिस्तान की तस्वीर होगी।

क्या पाकिस्तान की सियासत बदलने वाली है?

चार से सोलह प्रांत की मांग मामूली नहीं है।यह देश की संरचना बदल सकती है।अगर यह प्रस्ताव आगे बढ़ता है तो सत्ता का संतुलन बदलेगा।छोटे इलाके ज्यादा ताकत पाएंगे।बड़े प्रांतों का दबदबा घटेगा।यह पाकिस्तान की राजनीति को नई दिशा दे सकता है।अब सबकी नजर इस आंदोलन पर टिकी है।क्या यह मांग हकीकत बनेगी या विवाद में उलझेगी।

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