पाकिस्तान में पिछले कुछ सालों से एक अजीब पैटर्न सामने आ रहा है। वहां मोस्ट वॉन्टेड आतंकी लगातार मारे जा रहे हैं। ताजा मामला लाहौर का है। यहां लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े अमीर हमजा पर हमला हुआ। हमलावरों की पहचान अब तक साफ नहीं है। इस तरह की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। इससे बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। आखिर यह ऑपरेशन कौन चला रहा है।
अमीर हमजा आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का बड़ा नाम था। उसने संगठन की नींव रखने में अहम भूमिका निभाई थी। वह लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के निशाने पर था। अमेरिका ने भी उस पर प्रतिबंध लगाया था। उसका नाम कई आतंकी गतिविधियों से जुड़ा रहा है। ऐसे में उसका मारा जाना बड़ी घटना माना जा रहा है।
यह पहली घटना नहीं है। पिछले तीन से चार सालों में कई आतंकी इसी तरह मारे गए हैं। लश्कर, जैश और हिजबुल जैसे संगठनों के कमांडर निशाना बने हैं। 2023 में तो कुछ महीनों में कई बड़े नाम खत्म हुए। इससे साफ है कि यह कोई एक घटना नहीं है। यह लगातार चल रहा पैटर्न बन चुका है।
कई बड़े नाम इस सूची में शामिल हैं। परमजीत सिंह पंजरवार जैसे आतंकी मारे गए। शाहिद लतीफ को सियालकोट में गोली मारी गई। मुफ़्ती कैसर फारूक को कराची में निशाना बनाया गया। अख्तर कॉलोनी में जाहूर मिस्त्री भी मारा गया। यह सभी अलग-अलग जगहों पर मारे गए। लेकिन तरीका लगभग एक जैसा रहा।
कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया है कि यह अंदरूनी लड़ाई भी हो सकती है। आतंकी संगठनों के बीच टकराव की बात सामने आई है। भर्ती और फंडिंग को लेकर विवाद हो सकता है। हालांकि कुछ लोग इसे बाहरी ऑपरेशन भी मानते हैं। सच्चाई क्या है, यह अभी साफ नहीं है। लेकिन घटनाएं लगातार हो रही हैं।
इन घटनाओं ने पाकिस्तान की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कई आतंकी सरकारी सुरक्षा में भी थे। इसके बावजूद उन्हें निशाना बनाया गया। यह बड़ी चूक मानी जा रही है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा हो रही है। पाकिस्तान पर दबाव बढ़ सकता है।
यह सिलसिला आगे भी जारी रह सकता है। आतंकी नेटवर्क कमजोर पड़ सकते हैं। लेकिन इससे क्षेत्र में तनाव भी बढ़ सकता है। सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। दुनिया की नजर अब इन घटनाओं पर टिकी है। आने वाले समय में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।