ईरान तनाव के बीच पाकिस्तान का बड़ा बयान, ‘UAE के न्यूक्लियर प्लांट पर हमला हुआ तो मच जाएगी तबाही’

अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव के दौरान संयुक्त अरब अमीरात के ‘बराकाह न्यूक्लियर एनर्जी प्लांट’ पर हुए ड्रोन अटैक ने वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है.

Nidhi Jha
Edited By: Nidhi Jha

नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे भीषण तनाव के बीच संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के 'बराकाह न्यूक्लियर एनर्जी प्लांट' पर हुए ड्रोन हमले ने पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया है. इस गंभीर घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए पाकिस्तान ने कड़ी निंदा की है और इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन बताया है.

तबाही साबित हो सकता है

अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे पाकिस्तान ने चेतावनी दी है कि परमाणु संयंत्रों को जानबूझकर निशाना बनाना मानव जीवन, पर्यावरण और वैश्विक शांति के लिए 'तबाही' साबित हो सकता है.

​परमाणु प्लांट के सुरक्षा घेरे पर हुआ हमला

​यह घटना रविवार को हुई, जब यूएई के अल धफरा क्षेत्र में स्थित अरब जगत के एकमात्र वाणिज्यिक परमाणु ऊर्जा संयंत्र, 'बराकाह प्लांट' को निशाना बनाकर तीन ड्रोन दागे गए. हालांकि, यूएई की सेना ने दो ड्रोनों को सफलतापूर्वक मार गिराया, लेकिन एक ड्रोन आंतरिक सुरक्षा घेरे के बाहर लगे एक इलेक्ट्रिकल जनरेटर से जा टकराया, जिससे वहां भीषण आग लग गई. ​

हताहत होने की खबर

राहत की बात यह रही कि इस हमले में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के अनुसार, प्लांट का रेडियोलॉजिकल सुरक्षा स्तर पूरी तरह सामान्य है. प्लांट की यूनिट-3 को फिलहाल आपातकालीन डीजल जनरेटर से बिजली दी जा रही है.

​पाकिस्तान की कड़ी चेतावनी

​इस हमले के बाद पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने यूएई के साथ एकजुटता प्रकट की है. पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय द्वारा जारी बयान में कहा गया ​परमाणु प्रतिष्ठानों को किसी भी परिस्थिति में निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए. ऐसे लापरवाह कदमों के परिणाम विनाशकारी और अपरिवर्तनीय हो सकते हैं, जिनका असर इस क्षेत्र से कहीं आगे तक जाएगा. ​पाकिस्तान ने सभी पक्षों से अधिकतम संयम बरतने और तनाव को कम करने के लिए बातचीत व कूटनीति के रास्ते पर लौटने की पुरजोर अपील की है.

​वैश्विक तेल संकट गहराया

​यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब ईरान-अमेरिका युद्ध के चलते खाड़ी क्षेत्र में स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है. हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा होर्मुज स्ट्रेट को खोलने के लिए नौसैनिक मिशन की घोषणा और अमेरिकी नाकेबंदी के बाद ईरान ने खाड़ी देशों पर हमले तेज कर दिए हैं.

तेल की आपूर्ति ठप

होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने से एशियाई देशों को होने वाली तेल की आपूर्ति ठप है, जिससे वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छूते हुए 111 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं. यूएई पर हुए इस ताजा हमले ने दोनों देशों के बीच कायम बेहद नाजुक सीजफायर को भी खतरे में डाल दिया है.

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