क्या शांति वार्ता से पहले बिगड़ रहा माहौल? पाकिस्तान मीडिया ने इजरायल पर लगाए बड़े आरोप

ईरान सीजफायर वार्ता से पहले पाकिस्तान का मीडिया इजरायल के खिलाफ सख्त रुख अपनाता दिख रहा है. अखबारों और नेताओं के बयान कई सवाल खड़े कर रहे हैं- क्या इससे शांति प्रक्रिया प्रभावित होगी?

Shraddha Mishra

मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच अब पाकिस्तान का मीडिया भी खुलकर इस मुद्दे पर सक्रिय नजर आ रहा है. ईरान और सीजफायर को लेकर संभावित वार्ता से पहले पाकिस्तान के प्रमुख अखबारों और चैनलों का रुख साफ तौर पर इजरायल के खिलाफ दिखाई दे रहा है. इससे यह सवाल उठने लगा है कि क्या यह सिर्फ मीडिया की राय है या फिर इसके पीछे कोई बड़ी कूटनीतिक सोच भी काम कर रही है.

पाकिस्तान के प्रमुख अखबार डॉन ने अपने संपादकीय में इजरायल पर सीधा आरोप लगाया है कि वह ईरान के साथ होने वाली शांति वार्ता को कमजोर करने की कोशिश कर रहा है. अखबार के मुताबिक, इजरायल इस बात से नाराज है कि ईरान के खिलाफ उसकी और अमेरिका की संयुक्त रणनीति सफल नहीं हो पाई.

संपादकीय में यह भी कहा गया है कि इजरायल के अंदर ही उसकी नीतियों को लेकर आलोचना हो रही है, क्योंकि वह अपने सैन्य लक्ष्यों को हासिल नहीं कर सका. इसके बाद अब वह लेबनान में हमलों के जरिए अपना गुस्सा निकाल रहा है, जहां हिज़्बुल्लाह को निशाना बनाने के नाम पर आम नागरिकों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है.

'दाहिये सिद्धांत' का जिक्र

डॉन ने अपने लेख में ‘दाहिये सिद्धांत’ का भी उल्लेख किया, जिसके तहत किसी इलाके को पूरी तरह तबाह करने की रणनीति अपनाई जाती है. अखबार का दावा है कि इस नीति के तहत लेबनान में आम लोगों को निशाना बनाया गया, जो अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ है. साथ ही यह भी कहा गया कि इस तरह की कार्रवाई इजरायल के लिए नई नहीं है, बल्कि वह लंबे समय से ऐसी रणनीति अपनाता रहा है.

अमेरिका और ट्रंप पर भी टिप्पणी

अखबार ने यह भी आरोप लगाया कि इजरायल ने डोनाल्ड ट्रंप को गलत जानकारी देकर ईरान के खिलाफ सख्त रुख अपनाने के लिए प्रेरित किया. लेख में कहा गया है कि अब इजरायल यह सुनिश्चित करने में लगा है कि कोई भी नई शांति प्रक्रिया सफल न हो और क्षेत्र में फिर से तनाव बढ़े. संपादकीय में ट्रंप से सवाल किया गया कि क्या वह वास्तव में ‘अमेरिका फर्स्ट’ की नीति पर चलेंगे या फिर इजरायल के प्रभाव में निर्णय लेंगे, भले ही इससे पूरे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़े.

पाकिस्तान टुडे की चिंता

दूसरे प्रमुख अखबार पाकिस्तान टुडे ने भी अपने संपादकीय में इजरायल के लेबनान पर जारी हमलों को चिंताजनक बताया. अखबार के मुताबिक, यह हमला किसी गलतफहमी का नतीजा नहीं है, क्योंकि सीजफायर की घोषणा के समय ही साफ किया गया था कि इसमें लेबनान भी शामिल है.

रिपोर्ट में यह भी आशंका जताई गई कि इजरायल इस क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करने और सीमा बदलने की कोशिश कर सकता है. अखबार का मानना है कि पाकिस्तान को, एक संभावित मध्यस्थ के रूप में, इस स्थिति पर नजर रखनी चाहिए और शांति बनाए रखने के लिए प्रयास करने चाहिए.

जियो न्यूज और ईरान का रुख

जियो न्यूज ने ईरान के नेता मोजतबा खामेनेई के बयान को प्रमुखता से दिखाया. उन्होंने कहा कि ईरान युद्ध नहीं चाहता, लेकिन अगर उस पर हमला होता है तो वह जिम्मेदार लोगों को बख्शेगा नहीं. वहीं द नेशन ने एक रिपोर्ट के हवाले से बताया कि अगर इजरायल लेबनान में सीजफायर का उल्लंघन जारी रखता है, तो ईरान इस समझौते से पीछे हट सकता है. ईरान की सेना इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि लेबनान में किए गए हमलों और सीजफायर के उल्लंघन के लिए इजरायल को जवाब दिया जाएगा. इस बयान ने क्षेत्र में और तनाव बढ़ा दिया है.

PAK रक्षा मंत्री का पोस्ट

शांति वार्ता से ठीक पहले पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इजरायल के खिलाफ बेहद सख्त शब्दों का इस्तेमाल किया. उन्होंने इजरायल को “मानवता के लिए खतरा” और “कैंसर” जैसे शब्दों से संबोधित किया और लेबनान में हो रहे हमलों को नरसंहार बताया. उन्होंने यह भी कहा कि गाजा, ईरान और अब लेबनान में आम लोग मारे जा रहे हैं, जबकि इस्लामाबाद में शांति वार्ता चल रही है. हालांकि, इस बयान पर इजरायल की तीखी प्रतिक्रिया के बाद उन्होंने अपना पोस्ट हटा लिया.

ताजा खबरें

ट्रेंडिंग वीडियो