नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को अमेरिका के 250वें स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अमेरिकी लोगों को बधाई दी। उन्होंने भारत-अमेरिका रिश्तों को सिर्फ रणनीतिक साझेदारी नहीं, बल्कि साझा लोकतांत्रिक मूल्यों पर टिकी "वैश्विक भलाई की ताकत" बताया।
PM मोदी ने अपने संदेश में कहा, "1.4 अरब भारतीयों की ओर से, मैं राष्ट्रपति ट्रंप और अमेरिका के लोगों को आपकी स्वतंत्रता की ऐतिहासिक 250वीं वर्षगांठ पर हार्दिक बधाई देता हूं।"
उन्होंने आगे कहा कि भारत और अमेरिका लोकतंत्र, कानून के शासन और अपने नागरिकों की असीम क्षमता में यकीन रखते हैं। इसी वजह से दोनों देशों की दोस्ती दुनिया के लिए मिसाल है।
भविष्य को लेकर उम्मीद जताते हुए PM ने कहा कि आने वाले 250 साल अमेरिका के लिए समृद्धि, शांति और तरक्की लेकर आएं। साथ ही भारत-अमेरिका साझेदारी भी नई ऊंचाइयों को छुए।
PM का ये संदेश फ्रांस में हुए G7 शिखर सम्मेलन के कुछ हफ्ते बाद आया है। एवियन-लेस-बेन्स में फरवरी 2025 के बाद दोनों नेताओं की ये पहली आमने-सामने की मुलाकात थी। बैठक के बाद ट्रंप ने इसे "बहुत अच्छी बातचीत" बताया था और कहा था, "भारत और अमेरिका के संबंध बहुत अच्छे हैं। हम इससे ज्यादा करीब नहीं हो सकते।"
ये मुलाकात इसलिए भी अहम थी क्योंकि पिछले कुछ महीनों में टैरिफ विवाद, भारत-पाक मुद्दे पर ट्रंप के बयान, अमेरिकी इमिग्रेशन नियम और ओमान के पास एक हमले में 3 भारतीय नाविकों की मौत की वजह से रिश्तों में थोड़ी खटास आ गई थी। फिर भी दोनों नेताओं ने रणनीतिक और आर्थिक सहयोग को और गहरा करने की इच्छा जताई।
4 जुलाई को ट्रंप खुद वॉशिंगटन में जश्न का चेहरा बने। नेशनल मॉल में उन्होंने समर्थकों को संबोधित किया। इसे उन्होंने "अब तक की सबसे शानदार ट्रंप रैली" कहा। कार्यक्रम में मिलिट्री फ्लाईओवर और बड़ी आतिशबाजी भी हुई। पूरे अमेरिका में फोर्थ ऑफ जुलाई मनाया गया। फिलाडेल्फिया में फ्री कपकेक और 6 घंटे का कॉन्सर्ट हुआ। न्यूयॉर्क में tall ships की परेड निकली।
लेकिन इस बार जश्न को लेकर राजनीति भी गर्म रही। ट्रंप प्रशासन की 'Freedom 250' पहल ने द्विदलीय आयोग को पीछे छोड़ दिया। नेशनल मॉल को "ग्रेट अमेरिकन स्टेट फेयर" में बदल दिया गया, जिसमें बड़ा झूला, मिलिट्री एग्जिबिट और डिफेंस कंपनियों के स्टॉल लगे।
कई डेमोक्रेटिक राज्यों ने इसमें हिस्सा लेने से मना कर दिया। कुछ कलाकारों ने भी राजनीतिक रंग की वजह से नाम वापस ले लिए। विरोधियों का आरोप है कि इस जश्न में अमेरिकी इतिहास को बहुत धार्मिक और "साफ-सुथरा" दिखाया गया, जबकि गुलामी और नस्लीय भेदभाव जैसे मुद्दों को किनारे कर दिया गया।
इसके बावजूद 24 जून को ट्रंप की शुरुआती रैली में हजारों लोग पहुंचे। 'Freedom 250' के तहत फेथ रैली, खेल और अमेरिकी इतिहास से जुड़े कई कार्यक्रम भी हुए। First Updated : Saturday, 04 July 2026