अमेरिका से बढ़ी दूरी, रूस के करीब सऊदी अरब! ट्रंप विवाद के बीच पुतिन से बातचीत ने बदले समीकरण
मिडिल ईस्ट के तनाव के बीच मोहम्मद बिन सलमान और व्लादिमीर पुतिन की बातचीत ने नए कूटनीतिक संकेत दिए हैं. डोनाल्ड ट्रंप के बयान के बाद सऊदी-अमेरिका रिश्तों में आई खटास के बीच यह कॉल काफी अहम मानी जा रही है.

नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच अब कूटनीतिक मोर्चे पर भी तेजी से बदलाव देखने को मिल रहा है. इसी बीच सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच हुई फोन बातचीत ने वैश्विक राजनीति में नए संकेत दिए हैं.
यह बातचीत ऐसे समय पर हुई है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयान के बाद सऊदी-अमेरिका संबंधों में तनाव बढ़ता नजर आ रहा है. ट्रंप की टिप्पणी के बाद भले ही सऊदी अरब की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई, लेकिन कूटनीतिक गतिविधियां बहुत कुछ इशारा कर रही हैं.
ट्रंप के बयान से बढ़ा कूटनीतिक तनाव
हाल ही में एक सार्वजनिक मंच से ट्रंप ने सऊदी क्राउन प्रिंस को लेकर विवादित टिप्पणी की थी. उन्होंने संकेत दिया कि सऊदी नेतृत्व अब उनके दबाव में है और उन्हें "अच्छा व्यवहार" करना होगा. इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा और कूटनीतिक हलचल को जन्म दिया.
पुतिन और MBS की बातचीत पर टिकी नजरें
इसी पृष्ठभूमि में पुतिन और मोहम्मद बिन सलमान के बीच हुई बातचीत को बेहद अहम माना जा रहा है. दोनों नेताओं ने मिडिल ईस्ट में बिगड़ते हालात पर विस्तार से चर्चा की.
बातचीत के दौरान ईरान से जुड़े संघर्ष, बढ़ती मौतों और बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान पर चिंता जताई गई. पुतिन ने यह स्पष्ट संकेत दिया कि रूस सऊदी अरब की संप्रभुता और क्षेत्रीय सुरक्षा के समर्थन में खड़ा है.
OPEC+ के तहत सहयोग बढ़ाने पर जोर
ऊर्जा सुरक्षा इस चर्चा का एक महत्वपूर्ण मुद्दा रहा. ईरान से जुड़े तनाव के चलते तेल आपूर्ति और समुद्री मार्गों पर खतरा बढ़ा है, जिससे वैश्विक बाजार प्रभावित हो रहा है.
ऐसे में दोनों देशों ने OPEC+ के तहत सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति जताई, ताकि तेल की कीमतों को स्थिर रखा जा सके और बाजार में संतुलन बना रहे.
सैन्य कार्रवाई नहीं, कूटनीति पर जोर
बातचीत का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह रहा कि दोनों नेताओं ने सैन्य समाधान के बजाय कूटनीतिक रास्ते को प्राथमिकता देने की बात कही. उन्होंने तत्काल युद्धविराम और संवाद के जरिए समाधान निकालने पर बल दिया.
यह रुख अमेरिका की मौजूदा आक्रामक रणनीति से कुछ अलग नजर आता है.
सऊदी की बदलती विदेश नीति के संकेत
विशेषज्ञों के अनुसार, यह सिर्फ एक साधारण बातचीत नहीं बल्कि सऊदी अरब की बदलती विदेश नीति का संकेत है. लंबे समय तक अमेरिका का करीबी सहयोगी रहने वाला सऊदी अरब अब संतुलित रणनीति अपनाता दिख रहा है.
वह एक ओर अमेरिका के साथ संबंध बनाए रखना चाहता है, वहीं दूसरी ओर रूस और चीन जैसी वैश्विक शक्तियों के साथ भी अपने रिश्ते मजबूत कर रहा है.
ट्रंप विवाद के बाद स्पष्ट हुआ रुख
ट्रंप की बयानबाजी के बाद सऊदी अरब का यह रुख और साफ हो गया है. देश अब यह संदेश देना चाहता है कि वह किसी एक शक्ति पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहेगा और बदलते वैश्विक हालात में अपने हितों के अनुसार निर्णय लेगा.


