ट्रंप ने विदेशी दवाओं पर लगाया 100% टैरिफ, मेटल्स पर 50% से घटाकर किया 25; 120 दिन का दिया अल्टीमेटम
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने विदेशी ब्रांडेड दवाओं पर 100 प्रतिशत तक भारी टैरिफ लगाने का आदेश दिया है. ट्रंप का साफ संदेश है कि कंपनियों को दवाओं की कीमतें घटानी होंगी और उत्पादन भी अमेरिका में शिफ्ट करना होगा.

नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्यापार नीति में बड़ा बदलाव करते हुए विदेशी ब्रांडेड दवाओं पर 100 प्रतिशत तक भारी टैरिफ लगाने का आदेश दिया है. यह फैसला उन फार्मा कंपनियों पर सीधा असर डालेगा जो अपनी दवाएं अमेरिका के बाहर बनाती हैं. ट्रंप का साफ संदेश है कि कंपनियों को दवाओं की कीमतें घटानी होंगी और उत्पादन भी अमेरिका में शिफ्ट करना होगा.
जो कंपनियां इन शर्तों को नहीं मानेंगी, उन पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगेगा. अगर कंपनियां कुछ उत्पादन अमेरिका में शिफ्ट करती हैं तो उन्हें 20 प्रतिशत टैरिफ देना पड़ेगा. पूरी तरह शर्तें पूरी करने पर टैरिफ से छूट मिल सकती है.
120 दिन का अल्टीमेटम
ट्रंप प्रशासन ने बड़ी फार्मा कंपनियों को नए नियम लागू करने के लिए 120 दिन का समय दिया है. छोटी कंपनियों को 180 दिन की मोहलत मिली है. यूरोपीय संघ, जापान और दक्षिण कोरिया जैसी ट्रेड डील वाले देशों के लिए टैरिफ की दर 15 प्रतिशत तय की गई है. ट्रंप का दावा है कि इससे दवाएं सस्ती होंगी और अमेरिका में मैन्युफैक्चरिंग से नई नौकरियां पैदा होंगी.
मेटल्स पर राहतट्रंप ने स्टील, एल्युमिनियम और तांबे जैसे मेटल उत्पादों पर भी टैरिफ नियमों में बदलाव किया है. कई मेटल उत्पादों पर पहले 50 प्रतिशत तक टैरिफ था, जिसे अब घटाकर 25 प्रतिशत कर दिया गया है. जिन उत्पादों में मेटल की मात्रा 15 प्रतिशत से कम है, उन्हें टैरिफ से पूरी छूट दे दी गई है. यह कदम घरेलू उद्योगों को सस्ता कच्चा माल मुहैया कराने और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए उठाया गया है.
पिछले फैसले की भरपाई
एक साल पहले ट्रंप ने 'लिबरेशन डे' के तहत दुनिया भर पर भारी टैरिफ लगाए थे. सुप्रीम कोर्ट ने उन टैरिफ को गैरकानूनी करार दिया था, जिसके बाद सरकार को 166 अरब डॉलर वापस करने पड़ रहे हैं. अब नए नियमों से इस नुकसान की भरपाई और अमेरिकी उद्योगों को संरक्षण देने की कोशिश की जा रही है.
व्यापार जगत की प्रतिक्रिया
स्टील उद्योग ने इस फैसले का स्वागत किया है. उनका कहना है कि इससे घरेलू उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा. वहीं, फार्मा क्षेत्र और व्यापार संगठनों ने चिंता जताई है. उनका मानना है कि अचानक टैरिफ बढ़ने से दवाओं की कीमतें बढ़ सकती है और आम लोगों पर महंगाई का बोझ पड़ेगा.
यह फैसला वैश्विक व्यापार में हलचल मचा रहा है. अब देखना होगा कि विदेशी कंपनियां ट्रंप की शर्तों के आगे झुकती हैं या अमेरिकी बाजार में नई चुनौतियां खड़ी होती है. ट्रंप प्रशासन का कहना है कि ये कदम अमेरिका को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने में मदद करेंगे.


