मिडिल ईस्ट में युद्ध की आहट तेज, सऊदी ने एक्टिव किया रक्षा समझौता, पाकिस्तान की भूमिका पर सबकी नजरें 

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच सऊदी अरब और पाकिस्तान का रक्षा समझौता चर्चा में आ गया है। सऊदी रक्षा मंत्री की असीम मुनीर से मुलाकात के बाद नई अटकलें तेज हो गई हैं।

Lalit Sharma
Edited By: Lalit Sharma

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच एक नई राजनीतिक हलचल सामने आई है। सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच हुआ रक्षा समझौता अचानक चर्चा में आ गया है। सऊदी अरब के रक्षा मंत्री प्रिंस खालिद बिन सलमान ने इसके इस्तेमाल की घोषणा की है। उन्होंने पाकिस्तान के आर्मी चीफ जनरल असीम मुनीर से मुलाकात के बाद यह जानकारी दी। इसके बाद सवाल उठने लगे हैं कि क्या पाकिस्तान अब इस संघर्ष में उतर सकता है।

क्या सऊदी रक्षा समझौता सक्रिय?

सऊदी अरब और पाकिस्तान ने पिछले साल सितंबर में जॉइंट स्ट्रेटेजिक डिफेंस एग्रीमेंट किया था। इस समझौते के तहत अगर एक देश पर हमला होता है तो उसे दूसरे देश पर हमला माना जाएगा। यानी दोनों देश मिलकर जवाबी कार्रवाई कर सकते हैं। अब सऊदी अरब ने इस समझौते के इस्तेमाल का संकेत दिया है। इससे क्षेत्रीय राजनीति में नई हलचल पैदा हो गई है।

क्या असीम मुनीर से हुई अहम मुलाकात?

सऊदी रक्षा मंत्री खालिद बिन सलमान ने पाकिस्तान के आर्मी चीफ असीम मुनीर से मुलाकात की। इस मुलाकात में ईरान के कथित हमलों और क्षेत्रीय सुरक्षा पर चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि ईरान के ड्रोन और मिसाइल हमले सऊदी अरब की सुरक्षा के लिए खतरा बन रहे हैं। इसी वजह से दोनों देशों के बीच रणनीतिक समन्वय पर जोर दिया गया है।

क्या ईरान के हमलों से बढ़ा डर?

रिपोर्ट्स के मुताबिक सऊदी अरब को आशंका है कि ईरान या उसके सहयोगी हूती विद्रोही बड़े हमले कर सकते हैं। इसी खतरे को देखते हुए सऊदी शाही परिवार की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और किंग सलमान समेत कई वरिष्ठ नेताओं की सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। सुरक्षा एजेंसियां संभावित हमलों को लेकर सतर्क हो गई हैं।

क्या तेल ठिकाने भी बने निशाना?

सऊदी अरब का कहना है कि ईरान के ड्रोन और मिसाइल हमलों में तेल सुविधाओं और महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बनाया गया। रियाद में अमेरिकी दूतावास पर भी हमले की खबर सामने आई। इन घटनाओं ने सऊदी नेतृत्व को चिंतित कर दिया है। इसी वजह से सऊदी अरब अब अपने रक्षा समझौते को सक्रिय करने की तैयारी कर रहा है।

क्या बढ़ सकता है क्षेत्रीय युद्ध?

विश्लेषकों का मानना है कि अगर पाकिस्तान इस समझौते के तहत सक्रिय हुआ तो संघर्ष का दायरा और बढ़ सकता है। पहले से ही अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच तनाव जारी है। अब सऊदी अरब की भूमिका और पाकिस्तान की संभावित भागीदारी इस संकट को और जटिल बना सकती है। इससे पूरे मिडिल ईस्ट की सुरक्षा स्थिति बदल सकती है।

क्या कूटनीतिक रास्ता बचेगा?

विशेषज्ञों का कहना है कि इस समय सभी देशों को सावधानी से कदम उठाने की जरूरत है। अगर तनाव बढ़ा तो इसका असर पूरे क्षेत्र पर पड़ेगा। तेल बाजार से लेकर वैश्विक सुरक्षा तक कई मोर्चों पर असर दिखाई दे सकता है। फिलहाल दुनिया की नजर इस बात पर है कि आने वाले दिनों में सऊदी अरब और पाकिस्तान क्या फैसला लेते हैं।

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