'ईरान से जंग में अमेरिका का खजाना छलनी, 100 घंटों में 34 हजार करोड़ बर्बाद , ट्रंप की युद्ध नीति पर उठे बड़े सवाल

ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई अमेरिका को भारी पड़ती दिख रही है। रिपोर्ट के मुताबिक युद्ध के पहले 100 घंटों में ही अमेरिका को करीब 34 हजार करोड़ रुपये खर्च करने पड़े।

Lalit Sharma
Edited By: Lalit Sharma

ईरान के खिलाफ शुरू हुई सैन्य कार्रवाई अब अमेरिका के लिए महंगी साबित होती दिख रही है। रिसर्च में दावा किया गया है कि युद्ध के शुरुआती 100 घंटों में ही अमेरिका को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। अमेरिकी थिंक टैंक सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज की रिपोर्ट के अनुसार इस दौरान करीब 3.7 बिलियन डॉलर खर्च हो गए। भारतीय मुद्रा में यह रकम लगभग 34 हजार करोड़ रुपये के बराबर बताई जा रही है।

क्या हर दिन बढ़ रहा खर्च?

रिपोर्ट के मुताबिक युद्ध के दौरान अमेरिका को हर दिन करीब 891.4 मिलियन डॉलर खर्च करने पड़े। यह रकम सैन्य अभियानों, हथियारों और लॉजिस्टिक सपोर्ट पर लगी। विशेषज्ञों का कहना है कि आधुनिक युद्ध में सिर्फ लड़ाई ही नहीं बल्कि सुरक्षा और रक्षा व्यवस्था भी बेहद महंगी होती है। यही वजह है कि युद्ध शुरू होते ही खर्च तेजी से बढ़ने लगता है।

क्या भारी हथियारों का इस्तेमाल?

रिपोर्ट में बताया गया है कि अमेरिकी सेना ने शुरुआती 100 घंटों में 2000 से ज्यादा भारी हथियारों का इस्तेमाल किया। इनमें एडवांस्ड मिसाइल सिस्टम और स्टेल्थ बॉम्बर्स भी शामिल थे। इन हथियारों की तैनाती और संचालन में भारी खर्च आता है। खासकर स्टेल्थ बॉम्बर्स जैसे अत्याधुनिक हथियारों के इस्तेमाल से युद्ध की लागत और बढ़ जाती है।

क्या ईरानी ठिकानों पर बड़े हमले?

अमेरिका ने इन आधुनिक हथियारों के जरिए ईरान के कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। रिपोर्ट के अनुसार हमलों में ईरान की भूमिगत मिसाइल सुविधाओं को नुकसान पहुंचा है। लेकिन इसके साथ ही अमेरिका को ईरान के जवाबी हमलों को रोकने के लिए भी बड़ी तैयारी करनी पड़ी। इस वजह से सैन्य खर्च और बढ़ गया।

क्या बजट से बाहर गया खर्च?

रिपोर्ट में एक और अहम बात सामने आई है। युद्ध में खर्च हुई रकम का बड़ा हिस्सा पहले से तय अमेरिकी सैन्य बजट में शामिल नहीं था। लगभग 3.5 बिलियन डॉलर का खर्च बजट से बाहर बताया गया है। इसका मतलब है कि पेंटागन को अतिरिक्त फंड की जरूरत पड़ सकती है।

क्या कांग्रेस से मांगे जाएंगे पैसे?

विश्लेषकों का कहना है कि अगर युद्ध लंबा चला तो अमेरिकी सरकार को कांग्रेस से अतिरिक्त पैसे मांगने पड़ सकते हैं। पेंटागन के पास मौजूदा बजट में इतनी राशि नहीं है कि वह लंबे समय तक इस तरह की सैन्य कार्रवाई जारी रख सके। इस वजह से सरकार के सामने आर्थिक दबाव बढ़ सकता है।

क्या ट्रंप प्रशासन पर बढ़ेगा दबाव?

इस पूरे घटनाक्रम से अमेरिकी राजनीति में भी हलचल बढ़ सकती है। विपक्षी डेमोक्रेट्स पहले ही इस युद्ध का विरोध कर रहे हैं। अगर सरकार को अतिरिक्त बजट की जरूरत पड़ी तो राजनीतिक टकराव बढ़ सकता है। ऐसे में ट्रंप प्रशासन के सामने सैन्य और राजनीतिक दोनों मोर्चों पर चुनौती खड़ी हो सकती है।

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