ईरान पर अमेरिकी ड्रोन हमलों में पाकिस्तान की एंट्री के आरोप, क्या इस्लामाबाद ने खोल दिए वॉशिंगटन के लिए अपने सैन्य ठिकाने

ईरान और अमेरिका के बढ़ते टकराव के बीच पाकिस्तान की भूमिका पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पाकिस्तान ने अमेरिकी ड्रोन हमलों के लिए अपने बेस इस्तेमाल करने दिए।

Lalit Sharma
Edited By: Lalit Sharma

पश्चिम एशिया में बढ़ते ईरान संकट के बीच पाकिस्तान की भूमिका अचानक चर्चा में आ गई है। एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पाकिस्तान ने अमेरिका को ईरान के खिलाफ ड्रोन हमलों के लिए अपने ठिकानों का इस्तेमाल करने की अनुमति दी। अगर यह दावा सही साबित होता है तो इससे क्षेत्रीय तनाव और बढ़ सकता है। इससे पाकिस्तान की विदेश नीति पर भी सवाल उठने लगे हैं।

क्या ड्रोन हमलों के लिए दिए बेस?

रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी ड्रोन अभियानों के लिए पाकिस्तान के कुछ सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल किया गया। यह कदम बेहद संवेदनशील माना जा रहा है। क्योंकि इससे पाकिस्तान सीधे तौर पर ईरान-अमेरिका टकराव के समीकरण में शामिल होता दिख सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे पूरे क्षेत्र में अस्थिरता और बढ़ सकती है।

क्या पहले भी लगे ऐसे आरोप?

यह पहली बार नहीं है जब पाकिस्तान पर ऐसे आरोप लगे हों। अतीत में भी इस्लामाबाद पर अमेरिका के साथ खुफिया सहयोग करने के आरोप लगते रहे हैं। खासकर ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका की रणनीति में पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल उठते रहे हैं। हालांकि पाकिस्तान ने कई बार ऐसे आरोपों से इनकार किया है।

क्या नया रणनीतिक गठजोड़ बन रहा?

विश्लेषकों का कहना है कि क्षेत्र में एक नया रणनीतिक समीकरण बनता दिख रहा है। इसमें अमेरिका, सऊदी अरब और इजरायल जैसे देश ईरान के खिलाफ एक साथ खड़े दिखाई देते हैं। कुछ रिपोर्टों में पाकिस्तान को भी इसी रणनीतिक धड़े का हिस्सा बताया जा रहा है। इससे मिडिल ईस्ट की राजनीति और जटिल हो सकती है।

क्या आर्थिक कारण भी अहम?

विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति भी इस फैसले के पीछे एक कारण हो सकती है। पाकिस्तान इस समय गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा है। ऐसे में वह अमेरिका और खाड़ी देशों से आर्थिक सहायता और रक्षा सहयोग हासिल करना चाहता है। इसी वजह से वह उनके साथ रणनीतिक तालमेल बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।

क्या गाजा मुद्दे पर भी नई पहल?

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पाकिस्तान ने सऊदी अरब और कतर के साथ गाजा से जुड़ी एक पहल में शामिल होने का फैसला किया है। कागजों पर यह पहल शांति और मानवीय सहयोग की तरह दिखाई देती है। लेकिन कुछ विश्लेषकों का कहना है कि यह कदम ज्यादा प्रतीकात्मक हो सकता है।

क्या विश्वसनीयता पर उठे सवाल?

इन घटनाओं के बाद पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय विश्वसनीयता पर भी चर्चा शुरू हो गई है। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि क्षेत्रीय राजनीति में सिद्धांत और वास्तविक हितों के बीच फर्क बढ़ता जा रहा है। इस वजह से कई देशों की नीतियों पर सवाल उठ रहे हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा अंतरराष्ट्रीय राजनीति में और चर्चा का विषय बन सकता है।

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