नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनावपूर्ण रिश्तों में सुधार की संभावनाएं मजबूत होती दिखाई दे रही हैं. बुधवार को सामने आए संकेतों से यह उम्मीद बढ़ गई कि दोनों देशों के बीच एक महत्वपूर्ण समझौते को अंतिम रूप दिया जा सकता है. तेहरान की ओर से मिले संकेतों के अनुसार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन प्रस्तावित समझौते का समर्थन कर सकते हैं, जबकि इसके औपचारिक रूप से लागू होने की संभावना शुक्रवार को जताई जा रही है.
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिकी अधिकारियों ने कई दिनों तक चली गोपनीय वार्ताओं के बाद समझौता ज्ञापन (एमओयू) के मसौदे से जुड़ी कुछ अहम जानकारियां सार्वजनिक की हैं. हालांकि दोनों देशों ने अब तक अंतिम दस्तावेज जारी नहीं किया है, लेकिन कूटनीतिक हलकों में इसे एक महत्वपूर्ण प्रगति के रूप में देखा जा रहा है.
यदि दोनों देशों के शीर्ष नेता किसी औपचारिक कार्यक्रम में एक साथ दिखाई देते हैं और समझौते का समर्थन करते हैं, तो यह अमेरिका और ईरान के संबंधों के इतिहास में एक बड़ा मोड़ साबित हो सकता है. वर्ष 1979 की ईरानी क्रांति और अमेरिकी दूतावास बंधक संकट के बाद दोनों देशों के राजनयिक संबंध लगभग समाप्त हो गए थे. ऐसे में किसी भी उच्चस्तरीय समझौते को ऐतिहासिक उपलब्धि माना जाएगा.
हालांकि बढ़ती अटकलों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने समझौते को लेकर पूरी तरह आश्वस्त होने से परहेज किया है. उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समझौतों के बारे में अंतिम समय तक कुछ भी निश्चित नहीं कहा जा सकता. ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि वह समझौते से जुड़े कार्यक्रम में शामिल हो सकते हैं, लेकिन उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह अभी पूरी तरह तय नहीं है.
अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक प्रस्तावित दस्तावेज में ईरान के संवर्धित यूरेनियम भंडार को सीमित करने से जुड़े प्रावधान शामिल हैं. साथ ही क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा देने और लेबनान की सुरक्षा से जुड़े बिंदुओं पर भी सहमति बनने की जानकारी दी गई है.
इसके बदले अमेरिका कुछ आर्थिक प्रतिबंधों में आंशिक राहत देने पर विचार कर रहा है. हालांकि सभी प्रतिबंध हटाए जाने की संभावना फिलहाल नहीं है. मसौदे में होर्मुज जलडमरूमध्य से सीमित अवधि तक सुगम और बिना अतिरिक्त शुल्क के नौवहन की व्यवस्था का भी उल्लेख किया गया है, जो वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है.
ईरान की ओर से भी समझौते को लेकर सकारात्मक संकेत दिए गए हैं. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने कहा कि दोनों देशों के नेतृत्व स्तर पर इस पहल को समर्थन मिलने की संभावना है. यदि यह प्रक्रिया सफल रहती है, तो इसे राष्ट्रपति पेज़ेश्कियन की एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक उपलब्धि माना जाएगा, जिन्होंने सत्ता संभालने के बाद पश्चिमी देशों के साथ संवाद बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई थी.
हालांकि अंतिम निर्णय और औपचारिक घोषणा का इंतजार अभी बाकी है, लेकिन दोनों देशों के बीच बढ़ती बातचीत ने वैश्विक स्तर पर नई उम्मीदें जरूर पैदा कर दी हैं. First Updated : Wednesday, 17 June 2026