अमेरिका को आंखें दिखाने वाले वो 5 नेता, जिन्होंने सुपरपावर से नहीं मानी हारी
बेशक चीन और रूस लंबे समय से अमेरिका के रणनीतिक प्रतिद्वंद्वी रहे हैं, लेकिन कुछ ऐसे देश भी हैं जिनके राष्ट्राध्यक्षों ने अमेरिका को सीधे तौर पर चुनौती दी है. अब इस सूची में नया नाम जुड़ा है ब्राजील के राष्ट्रपति लूला डा सिल्वा का, जिन्होंने हाल ही में अमेरिका को सख्त चेतावनी दी.

दक्षिण अमेरिका के प्रमुख देश ब्राजील के राष्ट्रपति लूला डा सिल्वा ने हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को दो टूक जवाब देते हुए कहा कि ब्राजील एक संप्रभु राष्ट्र है और उस पर कोई दबाव नहीं डाला जा सकता. ट्रंप द्वारा टैरिफ लगाने की धमकी के जवाब में लूला ने कानूनी कार्रवाई की बात भी कही. लूला ऐसे पहले नेता नहीं हैं जिन्होंने अमेरिका की आर्थिक और राजनीतिक नीतियों का विरोध किया हो. इससे पहले भी दुनिया के कई प्रमुख राष्ट्राध्यक्ष अमेरिका के खिलाफ खुलकर बोल चुके हैं.
1. ह्यूगो चावेज (वेनेजुएला)
वेनेजुएला के पूर्व राष्ट्रपति ह्यूगो चावेज अमेरिका के प्रखर आलोचक माने जाते थे. 1999 में सत्ता में आने के बाद चावेज ने अमेरिका की पूंजीवादी नीतियों का कड़ा विरोध किया. उनका कहना था कि अमेरिका वेनेजुएला में समाजवाद को खत्म करके पूंजीवाद लागू करना चाहता है. 2002 में उनके खिलाफ तख्तापलट की कोशिश हुई, लेकिन जनता के समर्थन से वे सत्ता में वापस लौटे. चावेज की विचारधारा आज भी वहां की सरकार में जीवित है, जिसे वर्तमान राष्ट्रपति निकोलस मादुरो आगे बढ़ा रहे हैं.
2. फिदेल कास्त्रो (क्यूबा)
क्यूबा के क्रांतिकारी नेता फिदेल कास्त्रो ने 1959 में अमेरिकी समर्थित सरकार को हटाकर कम्युनिस्ट शासन की नींव रखी. कास्त्रो ने अमेरिका की साम्राज्यवादी सोच और पूंजीवादी नीतियों का विरोध किया. अमेरिका ने कास्त्रो को हटाने के कई प्रयास किए, लेकिन वे नाकाम रहे. कास्त्रो की नीतियों के कारण क्यूबा आज भी अमेरिका विरोधी विचारधारा के साथ खड़ा है.
3. किम जोंग-इल (उत्तर कोरिया)
उत्तर कोरिया के पूर्व तानाशाह और किम जोंग-उन के पिता किम जोंग-इल अमेरिका के सख्त विरोधी माने जाते थे. कोरियाई युद्ध के दौरान दक्षिण कोरिया में उनकी सेना ने कब्जा कर लिया था, लेकिन अमेरिकी हस्तक्षेप के कारण पीछे हटना पड़ा. इसके बाद किम ने सैन्य शक्ति बढ़ाने पर जोर दिया. आज उत्तर कोरिया के पास करीब 50 परमाणु हथियार हैं और वह अमेरिका की नीतियों को खुलकर चुनौती देता है.
4. अयातुल्ला खोमैनी (ईरान)
ईरान के पहले सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खोमैनी ने अमेरिका को “महाशैतान” कहा था. 1979 में तेहरान स्थित अमेरिकी दूतावास पर हमला हुआ, जिसमें 44 अमेरिकी कर्मचारी छह दिन तक बंधक रहे. खोमैनी की विचारधारा ने ईरान में आज तक अमेरिका विरोधी शासन को मजबूती दी है.


