800 अरब भी कम पड़े! ईरान युद्ध के लिए ट्रंप सरकार ने मांगे 200 अरब और, अमेरिका की संसद में छिड़ा बड़ा सियासी घमासान
ईरान युद्ध को लेकर अमेरिका में नया विवाद खड़ा हो गया है। ट्रंप सरकार ने 200 अरब डॉलर की अतिरिक्त फंडिंग मांगी है, जिस पर संसद में तीखी बहस शुरू हो गई है।

अमेरिकी रक्षा विभाग यानी पेंटागन ने ईरान युद्ध के लिए अतिरिक्त 200 अरब डॉलर की मांग की है। यह प्रस्ताव व्हाइट हाउस को भेजा जा चुका है। इतनी बड़ी रकम को मंजूरी दिलाना आसान नहीं होगा। यह मामला अब राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है। अमेरिका में इसे लेकर माहौल गर्म है।
क्या कहा रक्षा मंत्री ने?
अमेरिकी रक्षा मंत्री Pete Hegseth ने इस रकम पर सीधे जवाब देने से बचा। उन्होंने कहा कि राशि बदल सकती है। लेकिन उन्होंने यह जरूर कहा कि “बुरे लोगों से निपटने के लिए पैसे की जरूरत होती है।” इस बयान ने विवाद को और बढ़ा दिया है। अब यह मामला और ज्यादा चर्चा में आ गया है।
क्यों बढ़ा संसद में विरोध?
इस प्रस्ताव को संसद की मंजूरी जरूरी है। लेकिन कई सांसद इसके खिलाफ हैं। अभी तक इस युद्ध को आधिकारिक मंजूरी भी नहीं मिली है। ऐसे में इतने बड़े खर्च पर सवाल उठ रहे हैं। सांसद युद्ध की रणनीति और दायरे को लेकर भी चिंतित हैं। इस वजह से विरोध तेज होता दिख रहा है।
क्या रिपब्लिकन भी हैं असहमत?
हालांकि संसद में Republican Party का बहुमत है, फिर भी सभी एकमत नहीं हैं। कुछ नेता ज्यादा सरकारी खर्च के खिलाफ हैं। इन्हें ‘फिस्कल हॉक्स’ कहा जाता है। ये किसी भी हाल में खर्च बढ़ाने के पक्ष में नहीं हैं। इसलिए पार्टी के अंदर भी मतभेद दिख रहे हैं।
डेमोक्रेट्स का क्या रुख?
Democratic Party के नेता इस प्रस्ताव का खुलकर विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि पहले सरकार युद्ध की पूरी रणनीति बताए। बिना जानकारी के इतना बड़ा बजट मंजूर नहीं किया जा सकता। वे पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं।
नेताओं की क्या प्रतिक्रिया?
हाउस स्पीकर Mike Johnson ने इसे खतरनाक समय बताया। उन्होंने सुरक्षा के लिए फंडिंग का समर्थन किया, लेकिन पूरी जानकारी देखने की बात कही। वहीं Betty McCollum ने कड़ी आलोचना की। उन्होंने साफ कहा कि बिना जवाब के कोई “ब्लैंक चेक” नहीं दिया जाएगा। इस पर कई नेताओं की तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है।
क्या बढ़ेगा अमेरिका का रक्षा बजट? 7457035738
अगर यह प्रस्ताव पास हो जाता है तो अमेरिका का रक्षा बजट और बढ़ जाएगा। पहले ही यह बजट 800 अरब डॉलर से ज्यादा है। अब सवाल उठ रहा है कि क्या इतना बजट भी कम पड़ गया? आगे सरकार को या तो खुद यह बिल पास कराना होगा या विपक्ष से समझौता करना होगा। यह फैसला आने वाले समय में बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है।


