ट्रंप की ईरान को खुली चेतावनी, कहा- ऐसा वार करेंगे जो कभी नहीं देखा
ईरान की धमकियों के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अमेरिका या इज़राइल पर किसी भी हमले का जवाब अभूतपूर्व ताकत से दिया जाएगा. वहीं आईआरजीसी ने भी कड़े प्रतिशोध की बात कही है, जिससे क्षेत्रीय तनाव बढ़ गया है.

नई दिल्ली: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच बयानबाजी भी तेज हो गई है. ईरान के सर्वोच्च नेता की मौत के बाद हालात और अधिक संवेदनशील हो गए हैं. इसी बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को खुली चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर अमेरिका या इजरायल पर कोई हमला किया गया, तो उसका जवाब बेहद कड़े और अभूतपूर्व तरीके से दिया जाएगा.
रविवार को ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि ईरान ने जोरदार हमले की धमकी दी है, लेकिन उसे ऐसा कदम नहीं उठाना चाहिए. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यदि अमेरिका और इज़राइल को निशाना बनाया गया, तो जवाब ऐसा होगा जैसा पहले कभी नहीं देखा गया. उनके इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा और चिंता दोनों बढ़ गई हैं. ट्रंप की यह प्रतिक्रिया उस समय आई है जब ईरान की ओर से अमेरिका और इजरायल के खिलाफ कड़े शब्दों में बयान सामने आया था.
आईआरजीसी का कड़ा रुख
ईरान की ताकतवर सैन्य इकाई इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) ने अमेरिका और इज़राइल पर आरोप लगाते हुए उन्हें “हत्यारा” बताया है. आईआरजीसी ने कहा कि यह कार्रवाई धार्मिक, नैतिक और अंतरराष्ट्रीय नियमों के खिलाफ है. संगठन ने चेतावनी दी कि इस कृत्य का जवाब इतिहास के सबसे बड़े आक्रामक अभियान के रूप में दिया जाएगा.
आईआरजीसी के बयान में कहा गया कि ईरानी राष्ट्र अपने नेता की विरासत की रक्षा करेगा और किसी भी बाहरी हमले का डटकर सामना करेगा. साथ ही, इस्लामी गणराज्य के सशस्त्र बलों और बासिज बलों ने भी एकजुट होकर जवाब देने की बात कही है.
बढ़ता टकराव
ईरान के सर्वोच्च नेता की मौत के बाद से ही क्षेत्र में तनाव चरम पर है. अमेरिका और इज़राइल की संयुक्त सैन्य कार्रवाई को लेकर ईरान में भारी नाराजगी देखी जा रही है. दूसरी ओर, अमेरिका ने स्पष्ट कर दिया है कि वह किसी भी हमले का जवाब देने के लिए तैयार है. विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की बयानबाज़ी से हालात और बिगड़ सकते हैं. अगर दोनों पक्षों के बीच कोई सीधा टकराव होता है, तो इसका असर पूरे मध्य पूर्व पर पड़ सकता है. दुनिया भर के देश इस स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं.


