ट्रंप की व्यापार नीति पर लगा ब्रेक! कोर्ट के फैसले के बाद आधी रात से टैरिफों की वसूली होगी बंद

सुप्रीम कोर्ट ने ट्रम्प द्वारा IEEPA के तहत लगाए गए आयात शुल्क को गैरकानूनी घोषित कर दिया, जिसके बाद अमेरिका ने उनकी वसूली रोक दी. हालांकि, ट्रम्प ने तुरंत नया 15% वैश्विक टैरिफ लागू कर व्यापार नीति में नया मोड़ दे दिया.

Shraddha Mishra

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट के अहम फैसले के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए कुछ आयात शुल्क अब वसूले नहीं जाएंगे. यह वही टैरिफ थे जिन्होंने पिछले वर्षों में वैश्विक सप्लाई चेन को प्रभावित किया और कई देशों के साथ अमेरिका के संबंधों में तनाव पैदा किया. अदालत के फैसले ने इन शुल्कों की वैधता पर सवाल उठाते हुए उन्हें गैरकानूनी ठहरा दिया. अदालत के फैसले के तीन दिन शुल्कों की वसूली को बंद किया जा रहा है. 

अमेरिकी सीमा शुल्क और सीमा सुरक्षा एजेंसी ने आधिकारिक बयान जारी कर बताया कि 1977 के अंतर्राष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम (IEEPA) के तहत लगाए गए शुल्कों की वसूली मंगलवार को स्थानीय अमेरिकी समयानुसार रात 12.01 बजे (भारतीय समयानुसार सुबह 10.30 बजे) से बंद कर दी जाएगी. एजेंसी ने आयातकों को निर्देश दिया है कि संबंधित शुल्क कोड को कार्गो सिस्टम से निष्क्रिय कर दिया जाए. 

किन टैरिफ पर लागू होगी रोक?

यह निलंबन केवल IEEPA के तहत लगाए गए शुल्कों तक सीमित है. ट्रम्प प्रशासन के दौरान धारा 232 (राष्ट्रीय सुरक्षा) और धारा 301 (अनुचित व्यापार प्रथाओं) के तहत लगाए गए अन्य टैरिफ फिलहाल प्रभावी रहेंगे. एजेंसी ने यह भी कहा कि व्यापार समुदाय को आगे की जानकारी आवश्यकतानुसार दी जाएगी.

नया 15 प्रतिशत वैश्विक टैरिफ

दिलचस्प बात यह है कि अदालत के फैसले के कुछ ही घंटों बाद ट्रंप ने एक नया कदम उठाया. उन्होंने एक अलग कानूनी प्रावधान के तहत सभी देशों से आयात होने वाले सामान पर 15 प्रतिशत का समान टैरिफ लागू करने की घोषणा कर दी. यह नया शुल्क अमेरिकी व्यापार कानून की धारा 122 के आधार पर लगाया गया है.

इस धारा के तहत अधिकतम 15 प्रतिशत टैरिफ लगाया जा सकता है, लेकिन यदि इसे 150 दिनों से अधिक समय तक जारी रखना हो तो कांग्रेस की मंजूरी जरूरी होगी. इससे पहले किसी राष्ट्रपति ने इस प्रावधान का इस्तेमाल नहीं किया था, इसलिए आगे कानूनी चुनौतियों की संभावना जताई जा रही है.

अरबों डॉलर के राजस्व पर असर

अर्थशास्त्रियों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले से अमेरिकी खजाने पर बड़ा असर पड़ सकता है. अनुमान है कि 175 अरब डॉलर से अधिक की राशि दांव पर लग सकती है, क्योंकि अब अमान्य घोषित किए गए शुल्क से रोजाना सैकड़ों मिलियन डॉलर की आय हो रही थी. यदि आयातकों को राशि लौटानी पड़ी, तो सरकार को भारी वित्तीय दबाव का सामना करना पड़ सकता है.

अदालत के फैसले से चीन, दक्षिण कोरिया, जापान और ताइवान जैसे प्रमुख एशियाई निर्यातकों को राहत मिली है. ये देश वैश्विक विनिर्माण और तकनीकी आपूर्ति श्रृंखलाओं में अहम भूमिका निभाते हैं.

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