ट्रंप ने ईरान को दी धमकी, 'होर्मुज को तुरंत खोलो...नहीं तो तेल और पावर प्लांट पर...'
ईरान से बातचीत के दावे के बीच डोनाल्ड ट्रंप ने उसके तेल और पावर प्लांट पर हमले की चेतावनी दी है. यह बयान ऐसे समय में आया है जब इस संघर्ष का दायरा बढ़ता दिख रहा है.

अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी संघर्ष को करीब एक महीना हो चुका है, लेकिन अब तक इस टकराव का कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया है. इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ईरान को लेकर कड़ा रुख अपनाया है. उन्होंने दावा किया है कि ईरान के साथ बातचीत जारी है, हालांकि तेहरान ने इस बात से साफ इनकार किया है. इन विरोधाभासी बयानों के बीच ट्रंप ने ईरान को सख्त चेतावनी देते हुए अल्टीमेटम जारी कर दिया है.
ट्रंप ने क्या कहा?
ट्रंप ने कहा है कि यदि ईरान जल्द किसी समझौते के लिए आगे नहीं आता और होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने का कदम नहीं उठाता तो अमेरिका कड़ी सैन्य कार्रवाई करेगा. उन्होंने संकेत दिया कि ऐसी स्थिति में ईरान के अहम ठिकानों जैसे बिजली संयंत्र, तेल के कुएं और खार्ग द्वीप को निशाना बनाकर भारी तबाही मचाई जा सकती है. यह बयान ऐसे समय में आया है जब इस संघर्ष का दायरा बढ़ता दिख रहा है.
हाल के दिनों में यमन के हूती विद्रोही भी इस टकराव में सक्रिय हो गए हैं, जिससे क्षेत्रीय तनाव और गहरा गया है. होर्मुज जलडमरूमध्य के बाद अब बाब-अल-मंडेब जलमार्ग पर भी खतरे की स्थिति बनती दिखाई दे रही है, जो वैश्विक व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण रास्ते हैं. इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ गई है.
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक पोस्ट के जरिए कहा कि अमेरिका ईरान में एक नए और “जिम्मेदार” नेतृत्व के साथ गंभीर वार्ता कर रहा है, ताकि मौजूदा सैन्य अभियान को समाप्त किया जा सके. उन्होंने यह भी कहा कि बातचीत में कुछ प्रगति हुई है, लेकिन यदि जल्द नतीजा नहीं निकलता तो अमेरिका कड़ा कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा.
ट्रंप का दावा
उन्होंने यह भी दावा किया कि अब तक अमेरिका ने जानबूझकर ईरान के कुछ प्रमुख ठिकानों जैसे पावर प्लांट, तेल संसाधन और जल शुद्धिकरण संयंत्र को निशाना नहीं बनाया है. लेकिन जरूरत पड़ने पर इन सभी स्थानों को पूरी तरह नष्ट किया जा सकता है.
ट्रंप ने अपने बयान में यह भी जोड़ा कि संभावित सैन्य कार्रवाई को वह उन अमेरिकी सैनिकों की मौत का जवाब मानते हैं, जो पिछले कई दशकों में ईरान से जुड़े घटनाक्रमों में मारे गए. इस पूरे घटनाक्रम ने पहले से ही तनावपूर्ण हालात को और गंभीर बना दिया है, जिससे किसी बड़े टकराव की आशंका लगातार बढ़ रही है.


