मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव, जॉर्डन में दो अमेरिकी सैनिकों की मौत के बाद अमेरिका ने ईरान पर फिर बरसाए बम
जॉर्डन में दो अमेरिकी सैनिकों की मौत के बाद अमेरिका ने ईरान पर नए हवाई हमले किए हैं. इन हमलों से कुछ घंटे पहले ही जॉर्डन में ईरानी बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन हमलों के दौरान दो अमेरिकी सैनिकों की मौत हो गई थी.

नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है. रविवार तड़के अमेरिकी सेना ने ईरान के कई ठिकानों पर नए हवाई हमले किए, जिससे दोनों देशों के बीच टकराव और गहरा गया. इन हमलों से कुछ घंटे पहले ही जॉर्डन में ईरानी बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन हमलों के दौरान दो अमेरिकी सैनिकों की मौत हो गई थी. इस घटना के बाद पूरे क्षेत्र में सुरक्षा चिंताएं बढ़ गई हैं और मध्य पूर्व में हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं.
अमेरिकी केंद्रीय कमान (CENTCOM) के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर यह सैन्य अभियान चलाया गया. अमेरिकी सेना का कहना है कि कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य ईरान की उस सैन्य क्षमता को कमजोर करना था, जिससे वह होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों के लिए खतरा पैदा कर सकता है. साथ ही, जॉर्डन में अमेरिकी सैनिकों पर हुए हमले के लिए जिम्मेदार माने जा रहे इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़े ठिकानों को भी निशाना बनाया गया. अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई क्षेत्र में सुरक्षा बनाए रखने के लिए जरूरी थी.
जॉर्डन हमले में दो सैनिकों की मौत
सेंटकॉम ने जानकारी दी कि जॉर्डन में हुए हमले में दो अमेरिकी सैनिकों की जान चली गई, जबकि एक अन्य सैन्यकर्मी अब भी लापता है. इसके अलावा चार सैनिक घायल हुए थे, जिन्हें इलाज के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है. अमेरिकी सेना ने कहा कि मृत सैनिकों की पहचान फिलहाल सार्वजनिक नहीं की जाएगी. पहले उनके परिवारों को आधिकारिक रूप से सूचना दी जाएगी, उसके बाद ही नाम जारी किए जाएंगे.
रक्षा सचिव ने जताया कड़ा रुख
अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने सैनिकों की मौत पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि इस घटना से अमेरिका का संकल्प और मजबूत हुआ है. उन्होंने कहा कि जिन सैनिकों ने अपनी जान गंवाई है, उनका बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा और अमेरिका अपने हितों तथा सैनिकों की सुरक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाता रहेगा. उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि अमेरिकी ठिकानों पर हमले जारी रहे तो आगे भी सख्त सैन्य कार्रवाई की जा सकती है.
ईरान में किन इलाकों को बनाया गया निशाना
ईरानी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी सेना ने दक्षिणी ईरान के सिरिक बंदरगाह के आसपास के क्षेत्रों में हवाई हमले किए. इसके अलावा हाजीआबाद के पास भी सैन्य कार्रवाई की खबर सामने आई है. हालांकि, शुरुआती जानकारी के मुताबिक इन हमलों में किसी के मारे जाने या बड़े नुकसान की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. ईरानी प्रशासन ने भी इस संबंध में विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की है.
ईरान ने दी कड़ी चेतावनी
अमेरिकी हमलों के बाद ईरान ने भी अपने तेवर और सख्त कर दिए हैं. ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने कहा कि अमेरिका और उसके सहयोगियों को जल्द ही ऐसा जवाब मिलेगा जिसे वे लंबे समय तक याद रखेंगे. उन्होंने अमेरिका पर दोनों देशों के बीच हुए समझौतों का पालन न करने का आरोप लगाया और कहा कि वाशिंगटन की नीतियों पर भरोसा नहीं किया जा सकता. ईरान का कहना है कि यदि उस पर हमले जारी रहे तो वह भी जवाबी कार्रवाई को और तेज करेगा.
होर्मुज जलडमरूमध्य बना तनाव का केंद्र
मौजूदा विवाद का सबसे अहम केंद्र होर्मुज जलडमरूमध्य है. यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है और वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है. अमेरिका का आरोप है कि ईरान इस जलमार्ग से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है. दूसरी ओर, ईरान का कहना है कि अमेरिका इस क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाकर रणनीतिक नियंत्रण स्थापित करना चाहता है. दोनों देशों के इन आरोप-प्रत्यारोप ने क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा दिया है.
दोनों देशों के बीच बयानबाजी तेज
ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के प्रमुख इब्राहिम अजीजी ने कहा कि यदि अमेरिकी सैनिक ईरान की चेतावनियों को गंभीरता से समझें तो उन्हें इस क्षेत्र से हटने में देर नहीं करनी चाहिए. वहीं, ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने अमेरिका पर समुद्री मार्गों पर अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश करने का आरोप लगाया. इसके जवाब में अमेरिका ने कहा कि ईरान अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों को डराने और क्षेत्र में अस्थिरता फैलाने की कोशिश कर रहा है.
यूएई ने शांति की अपील की
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव को देखते हुए संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है. यूएई के विदेश मंत्रालय ने कहा कि नागरिक ठिकानों और बुनियादी ढांचे पर हमले अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ हैं और इन्हें किसी भी स्थिति में उचित नहीं ठहराया जा सकता. यूएई ने दोनों देशों से बातचीत के जरिए समाधान निकालने पर जोर देते हुए कहा कि लगातार बढ़ता सैन्य तनाव पूरे क्षेत्र की शांति और वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है.


