अमेरिका ने ईरानी तेल बिक्री को दी 30 दिन की छूट, वैश्विक बाजार को राहत

वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच अमेरिका ने बड़ा फैसला लेते हुए समुद्र में फंसे ईरानी तेल की बिक्री के लिए 30 दिनों की अस्थायी छूट दी है. इस कदम का उद्देश्य बाजार में आपूर्ति बढ़ाकर कीमतों पर दबाव कम करना है.

Yogita Pandey
Edited By: Yogita Pandey

नई दिल्ली: वैश्विक ऊर्जा बाजार में बढ़ते दबाव और आपूर्ति संकट को देखते हुए अमेरिका ने एक अहम फैसला लिया है. अमेरिका ने समुद्र में पहले से फंसे ईरानी तेल की बिक्री के लिए 30 दिनों की अस्थायी छूट जारी की है, जिससे बाजार में तुरंत आपूर्ति बढ़ाने की कोशिश की जा रही है.

यह कदम अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जारी संघर्ष के बीच उठाया गया है, जहां ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है. इस फैसले का उद्देश्य वैश्विक बाजार में स्थिरता लाना और तेल की कीमतों पर पड़ रहे दबाव को कम करना है.

बाजार को स्थिर करने की कोशिश

X पर इस फैसले की जानकारी देते हुए अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा कि यह कदम मौजूदा आपूर्ति को खोलकर बाजार को स्थिर करने के लिए उठाया गया है. उन्होंने कहा "दुनिया के लिए इस मौजूदा आपूर्ति को अस्थायी रूप से खोलकर, संयुक्त राज्य अमेरिका लगभग 140 मिलियन बैरल तेल को वैश्विक बाजारों में शीघ्रता से पहुंचाएगा."

20 मार्च से 19 अप्रैल तक सीमित छूट

अमेरिकी वित्त विभाग द्वारा जारी लाइसेंस के अनुसार, यह छूट केवल 20 मार्च से 19 अप्रैल के बीच लागू रहेगी. इस दौरान उन जहाजों पर पहले से लदे ईरानी कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की बिक्री की अनुमति दी गई है.

अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह छूट बेहद सीमित है और इसके तहत नए उत्पादन या नई खरीद की अनुमति नहीं होगी. बेसेंट ने कहा, "यह अस्थायी, अल्पकालिक प्राधिकरण सख्ती से केवल उस तेल तक सीमित है जो पहले से ही परिवहन में है और नई खरीद या उत्पादन की अनुमति नहीं देता है."

ऊर्जा आपूर्ति बढ़ाने पर फोकस

उन्होंने आगे कहा कि इस फैसले से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में इजाफा होगा और कीमतों को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी."ऑपरेशन एपिक फ्यूरी को जारी रखते हुए, हम कीमतों को कम रखने के लिए तेहरान के खिलाफ ईरानी तेल का इस्तेमाल करेंगे."

व्यापक ऊर्जा रणनीति का हिस्सा

यह छूट हाल के हफ्तों में दी गई तीसरी बड़ी राहत है. इससे पहले रूस से जुड़े तेल पर भी इसी तरह की छूट दी जा चुकी है. बेसेंट ने बताया कि प्रशासन पहले ही वैश्विक बाजार में सैकड़ों मिलियन बैरल अतिरिक्त तेल लाने की दिशा में काम कर चुका है.

उन्होंने कहा, "अब तक, ट्रंप प्रशासन वैश्विक बाजार में लगभग 440 मिलियन अतिरिक्त बैरल तेल लाने के लिए काम कर रहा है."

ईरान पर गंभीर आरोप

बेसेंट ने ईरान पर प्रमुख समुद्री मार्गों में बाधा उत्पन्न करने की कोशिश करने का आरोप भी लगाया. उन्होंने कहा, "ईरान वैश्विक आतंकवाद का मूल सूत्रधार है और हम इस महत्वपूर्ण लड़ाई को अनुमान से भी कहीं अधिक तेजी से जीत रहे हैं."

दबाव बनाए रखने की रणनीति

हालांकि छूट दी गई है, लेकिन अमेरिका ने यह भी साफ किया है कि ईरान पर आर्थिक दबाव जारी रहेगा. बेसेंट ने कहा,
"ईरान को उत्पन्न राजस्व तक पहुंचने में कठिनाई होगी और संयुक्त राज्य अमेरिका अधिकतम दबाव बनाए रखना जारी रखेगा,"

उन्होंने यह भी कहा कि यह कदम व्यापक प्रतिबंधों में ढील दिए बिना बाजार को स्थिर करने के उद्देश्य से लिया गया है.

चीन की भूमिका पर भी टिप्पणी

बेसेंट ने ईरानी तेल के भंडारण में चीन की भूमिका का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा,
"प्रतिबंधित ईरानी तेल को चीन सस्ते दामों पर जमा कर रहा है."

युद्ध और बाजार के बीच संतुलन

यह फैसला दर्शाता है कि अमेरिका एक ओर ईरान पर सैन्य दबाव बनाए रखना चाहता है, वहीं दूसरी ओर वैश्विक ऊर्जा बाजार को भी संतुलित रखना उसकी प्राथमिकता है. खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य में संभावित व्यवधान को देखते हुए यह कदम अहम माना जा रहा है.

अंत में बेसेंट ने कहा,"ट्रम्प प्रशासन दुनिया को ऊर्जा की आपूर्ति को अधिकतम करने के लिए अमेरिका की आर्थिक और सैन्य शक्ति का उपयोग करना जारी रखेगा."

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