अमेरिका ने जारी की ईरानी ड्रोन हमले में मारे गए 4 सैनिकों की पहचान, राष्ट्रपति ने दी प्रतिक्रिया

कुवैत में ईरानी ड्रोन हमले में छह अमेरिकी सैनिकों की मौत हो गई. पेंटागन ने चार की पहचान जारी की है. घटना के बाद अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ गया है, जबकि दोनों पक्षों से तीखे बयान सामने आए हैं.

Shraddha Mishra

नई दिल्ली: ईरानी ड्रोन हमले में छह अमेरिकी सैनिकों में से पेंटागन ने चार सैनिकों की पहचान सार्वजनिक करते हुए उनके नाम और तस्वीरें जारी की हैं. इस घटना ने अमेरिका-ईरान टकराव को नई दिशा दे दी है. हमले में मारे गए दो अन्य सैनिकों की पहचान अभी तक सार्वजनिक नहीं की गई है. बताया गया है कि कुवैत के पोर्ट शुआइबा में स्थित एक कमांड सेंटर पर ड्रोन हमला हुआ था, जिसके दौरान ये सैनिक वहां तैनात थे.

पेंटागन के अनुसार, हमले में जान गंवाने वालों में कैप्टन कोडी खोर्क (35), सार्जेंट फर्स्ट क्लास नोआ टिटजेंस (42), सार्जेंट फर्स्ट क्लास निकोल अमोर (39) और सार्जेंट डेक्लान कोडी (20) शामिल हैं. ये सभी सैनिक आयोवा स्थित 103वें सस्टेनमेंट कमांड की आर्मी रिजर्व यूनिट से जुड़े थे. यह यूनिट सेना को भोजन, ईंधन, पानी, गोला-बारूद और अन्य जरूरी सामान उपलब्ध कराने का काम करती है.

अमेरिकी नेताओं की प्रतिक्रिया

आर्मी सेक्रेटरी डेनियल ड्रिस्कॉल ने कहा कि इन सैनिकों ने देश की रक्षा के लिए स्वेच्छा से सेवा दी और उनकी कुर्बानी हमेशा याद रखी जाएगी. उन्होंने परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की और सैनिकों की बहादुरी को सलाम किया. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस घटना पर प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि यह दुखद है, लेकिन संघर्ष के दौरान ऐसी घटनाएं हो सकती हैं. उनके बयान से यह संकेत मिलता है कि हालात अभी और गंभीर हो सकते हैं.

ईरान का अमेरिका पर बड़ा आरोप

इस बीच, ईरान ने अमेरिका पर गंभीर आरोप लगाए हैं. ईरानी नेतृत्व का कहना है कि अमेरिका जानबूझकर वैश्विक संघर्षों को बढ़ावा दे रहा है. उनका दावा है कि वॉशिंगटन उभरती शक्तियों जैसे भारत, चीन और रूस को मजबूत होते नहीं देखना चाहता. ईरान के सुप्रीम लीडर के कार्यालय के विशेष प्रतिनिधि अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने एक इंटरव्यू में कहा कि अमेरिका का लक्ष्य केवल ईरान नहीं है. 

उनके अनुसार, अमेरिका भविष्य में अन्य देशों पर भी दबाव बनाने की कोशिश करेगा ताकि वैश्विक सत्ता संतुलन उसके पक्ष में बना रहे. इलाही ने यह भी कहा कि दुनिया बहुध्रुवीय व्यवस्था की ओर बढ़ रही है, लेकिन अमेरिका इस बदलाव से असहज है. हालांकि उन्होंने संकेत दिया कि ईरान बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन वह ऐसी शर्तों पर समझौता नहीं करेगा जिन्हें वह अपमानजनक मानता हो.

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