ईरान युद्ध पर ख्वाजा आसिफ का बड़ा आरोप बोले, 'पाकिस्तान को घेरने की साजिश रची जा रही'
ईरान में जारी सैन्य संघर्ष के बीच पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने इजरायल पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने दावा किया कि यह युद्ध एक "जायोनी साजिश" का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य पाकिस्तान को "अधीन राज्य" बनाना है और इसमें भारत तथा अफगानिस्तान भी शामिल हो सकते हैं.

नई दिल्ली: अमेरिका और इज़रायल द्वारा ईरान में किए गए हमलों के बाद पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर है. इस बीच पाकिस्तान ने भी इस संघर्ष को लेकर अपनी चिंता जताई है. ईरान के साथ 900 किलोमीटर से अधिक लंबी सीमा साझा करने वाला पाकिस्तान खुद को इस संकट से सीधे प्रभावित मान रहा है.
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने मंगलवार को ईरान में चल रहे सशस्त्र संघर्ष को “ज़ायोनी साजिश” करार देते हुए दावा किया कि इसका अंतिम उद्देश्य पाकिस्तान को “अधीनस्थ राज्य” बनाना है. उन्होंने यह भी कहा कि यदि इज़रायल इस संघर्ष में सफल होता है तो भारत, अफगानिस्तान और ईरान को शामिल करते हुए पाकिस्तान के खिलाफ एक समन्वित रणनीति बन सकती है.
जायोनी साजिश का आरोप
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में आसिफ ने कहा कि जायोनिज्म जो यहूदी मातृभूमि की स्थापना और सुरक्षा से जुड़ा आंदोलन है, 1948 में इजरायल के गठन के बाद से इस्लामी दुनिया को प्रभावित करने वाले लगभग हर बड़े संघर्ष में "प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष" रूप से शामिल रहा है.
उन्होंने दावा किया कि मुस्लिम देशों में होने वाले बड़े पैमाने के टकरावों के पीछे ज़ायोनिस्ट विचारधारा प्रमुख प्रेरक शक्ति रही है. आसिफ ने यह भी कहा कि “प्रमुख वैश्विक शक्तियां ज़ायोनिज़्म की बंधक बनी हुई थीं” और दशकों से वैश्विक अर्थव्यवस्था की दिशा इसी विचारधारा से प्रभावित रही है.
ईरान पर युद्ध थोपा गया
मौजूदा संघर्ष का जिक्र करते हुए आसिफ ने कहा कि तेहरान बातचीत के लिए तैयार था, लेकिन उस पर “युद्ध थोपा गया है.” उन्होंने आरोप लगाया कि यह युद्ध "जायोनिस्टों द्वारा रचा गया" है, जिसका मकसद पाकिस्तान की सीमाओं तक इजरायल के प्रभाव को बढ़ाना है.
आसिफ के अनुसार, यदि इज़रायल इस संघर्ष में विजयी होता है तो भारत, अफगानिस्तान और ईरान मिलकर पाकिस्तान के खिलाफ साझा रणनीति अपना सकते हैं. उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसी स्थिति में "हम चारों ओर से दुश्मनों से घिर जाएँगे तथा पाकिस्तान एक अधीन राज्य बन जाएगा".
पाकिस्तान की आंतरिक और सीमाई चुनौतियां
पाकिस्तान इस समय तालिबान-शासित अफगानिस्तान के साथ “खुले युद्ध” जैसी स्थिति में है. मई 2025 में उसका भारत के साथ भी सीमित सैन्य टकराव हुआ था.
ईरान, पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत से सटी सीमा साझा करता है, जो लंबे समय से विद्रोह की गतिविधियों के कारण संवेदनशील क्षेत्र रहा है. ऐसे में क्षेत्रीय अस्थिरता पाकिस्तान की सुरक्षा चिंताओं को और बढ़ा रही है.
मुस्लिम देशों से एकता की अपील
आसिफ ने पाकिस्तान की परमाणु शक्ति का उल्लेख करते हुए कहा कि यही क्षमता देश को "जायोनिस्टों" से सुरक्षित बनाए हुए है. उन्होंने कहा, "हमारी सशस्त्र सेनाओं की ताकत को विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त है."
उन्होंने 1998 के परमाणु परीक्षणों का जिक्र करते हुए पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की भूमिका को याद किया, जिनके कार्यकाल में पाकिस्तान ने औपचारिक रूप से अपनी परमाणु क्षमता की घोषणा की थी.
फिलिस्तीन के समर्थन में उन्होंने कहा, "फिलिस्तीन स्वतंत्र हो," और मुस्लिम देशों से एकजुट होकर साझा चुनौतियों का सामना करने की अपील की.
क्षेत्रीय संघर्ष की पृष्ठभूमि
यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और इज़रायल के हमलों के बाद ईरान में व्यापक सैन्य टकराव जारी है. इन हमलों में ईरान के सैन्य और धार्मिक ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा. इसके बाद तेहरान ने बहरीन, ओमान, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब समेत कई देशों की ओर ड्रोन और मिसाइलें दागीं, जिससे पूरे मध्य पूर्व में अस्थिरता बढ़ गई है.
विश्लेषकों के अनुसार, आसिफ की टिप्पणियां पाकिस्तान के उस दृष्टिकोण को दर्शाती हैं, जिसमें वह खुद को क्षेत्रीय शत्रुओं से घिरा हुआ मानता है. भारत को मुख्य विरोधी के रूप में प्रस्तुत करने की उसकी नीति और क्षेत्रीय तनाव ने उसकी कूटनीतिक स्थिति को जटिल बना दिया है.


