अमेरिका-ईरान युद्ध में बर्बाद हुआ पाकिस्तान! मात्र 5-7 दिन का कच्चा तेल बचा, पेट्रोलियम मंत्री का चौंकाने वाला खुलासा; लॉकडाउन की तैयारी शुरू

मिडिल ईस्ट में जारी तनाव में पकिस्तान खुद को वैश्विक मंच पर मध्यस्था बताता है. वहीं दूसरी तरफ आर्थिक समस्या जूझ रहा है. पेट्रोलियम मंत्री ने ऐसी जानकारी साझा की है, जिससे हर कोई हैरान हो गया है.

Sonee Srivastav

नई दिल्ली: पाकिस्तान इन दिनों गंभीर ऊर्जा संकट से जूझ रहा है. वैश्विक मंच पर खुद को मध्यस्थ बताने वाले पाकिस्तान को अब अपने घरेलू मोर्चे पर बड़ी मुश्किल का सामना करना पड़ रहा है. इस दौरान एक जानकारी सामने आई है, जिसे जानने के बाद हर तरफ हलचल मच गई है. 

संकट की मुख्य वजह

मध्य पूर्व में ईरान-अमेरिका के बीच बढ़े तनाव के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज लगभग बंद हो गया है. दुनिया के करीब 20 प्रतिशत कच्चे तेल का परिवहन इसी रास्ते से होता है. पाकिस्तान अपनी ज्यादातर तेल जरूरतें खाड़ी देशों से आयात करता है. रास्ता बंद होने और जहाजों की कमी से सप्लाई पूरी तरह प्रभावित हो गई है.

पेट्रोलियम मंत्री का चौंकाने वाला बयान

पाकिस्तान के पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक ने हाल ही में एक टीवी कार्यक्रम में देश की स्थिति पर खुलकर बात की. उन्होंने बताया कि देश के पास फिलहाल केवल 5 से 7 दिनों का कच्चा तेल बचा है. पेट्रोल का स्टॉक तो लगभग खत्म हो चुका है, जबकि डीजल के भंडार 26-28 दिनों और एलपीजी के 15 दिनों के आसपास है. 

मंत्री ने चेतावनी दी कि ईरान-अमेरिका संघर्ष जल्द खत्म होने के आसार नहीं दिख रहे. इससे वैश्विक तेल बाजार में भारी अनिश्चितता बनी हुई है. दुबई क्रूड की कीमतें पहले कभी इतनी ऊंची स्तर पर नहीं पहुंची थी. पाकिस्तान ने एयरलाइंस के लिए ईंधन की कमी को लेकर NOTAM जारी कर दिया है, जो देश की स्थिति की गंभीरता दर्शाता है.

लॉकडाउन जैसी सख्ती की तैयारी

ईंधन बचाने के लिए शाहबाज शरीफ सरकार कड़े उपायों पर विचार कर रही है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पेट्रोल-डीजल की खपत घटाने के लिए लॉकडाउन जैसी पाबंदियां लगाई जा सकती है. सरकारी और निजी दफ्तरों में कर्मचारियों को घर से काम करने को कहा जा सकता है.

स्कूल-कॉलेज बंद करके पढ़ाई को ऑनलाइन मोड में शिफ्ट करने की योजना है. लोगों से निजी वाहनों का कम इस्तेमाल करने और कार शेयरिंग की अपील की जा रही है.

बढ़ती महंगाई और आर्थिक दबाव

पाकिस्तान पहले से ही आर्थिक संकट और महंगाई से परेशान है. इस नई समस्या से पेट्रोल-डीजल की कीमतों की समीक्षा अब हर हफ्ते हो सकती है. जहाजों का बीमा खर्च भी कई गुना बढ़ गया है, जिसका बोझ आम आदमी पर पड़ेगा. परिवहन महंगा होने से सब्जी, फल, राशन और दवाओं की कीमते और बढ़ जाएगी.

जो देश दूसरों के बीच मध्यस्थता का दावा करता है, वह अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने में असफल नजर आ रहा है. विदेशी मुद्रा भंडार की कमी और आईएमएफ की शर्तों के बीच यह संकट पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा खतरा बन सकता है. 

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