कमजोर पड़ती दिख रही शांति की उम्मीदें... ईरान के प्रस्ताव से नाखुश ट्रंप, परमाणु डील फिर बना अड़ंगा
ईरान के चरणबद्ध शांति प्रस्ताव को अमेरिका ने खारिज कर दिया है, क्योंकि उसमें परमाणु कार्यक्रम को बाद में रखने की बात कही गई थी. इस फैसले से क्षेत्रीय तनाव और वैश्विक बाजारों पर असर बढ़ता दिख रहा है.

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक बातचीत एक बार फिर अटकती नजर आ रही है. हालात ऐसे बन गए हैं कि शांति की उम्मीदें कमजोर पड़ती दिख रही हैं. ताजा रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका ईरान के नए प्रस्ताव से संतुष्ट नहीं है, जिससे इस पूरे संकट के जल्द सुलझने की संभावना कम हो गई है.
सूत्रों के मुताबिक, डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ईरान के उस प्रस्ताव से सहमत नहीं है, जिसमें विवाद को चरणबद्ध तरीके से हल करने की बात कही गई है. अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम के मुद्दे को बाद के चरणों में रखने की बात कही है, जो अमेरिका के लिए स्वीकार्य नहीं है. अमेरिका का साफ कहना है कि किसी भी समझौते में सबसे पहले परमाणु कार्यक्रम को शामिल करना जरूरी है. अगर इसे अलग रखा गया, तो समझौता अधूरा माना जाएगा.
ईरान की तीन-स्तरीय योजना क्या है
ईरान ने मौजूदा गतिरोध को खत्म करने के लिए एक तीन चरणों वाला प्रस्ताव रखा है. इसके तहत सबसे पहले अमेरिका और इजराइल के साथ जारी संघर्ष को खत्म करने और भविष्य में हमले न होने की गारंटी देने की बात कही गई है. दूसरे चरण में समुद्री रास्तों पर लगे प्रतिबंध हटाने और खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही सामान्य करने का प्रस्ताव है. तीसरे और अंतिम चरण में ईरान के परमाणु कार्यक्रम और यूरेनियम संवर्धन जैसे संवेदनशील मुद्दों पर बातचीत करने की योजना है.
अमेरिका की सख्त शर्त
अमेरिकी अधिकारियों ने इस प्रस्ताव को खारिज करते हुए कहा है कि परमाणु मुद्दा सबसे अहम है और इसे शुरुआत में ही सुलझाना होगा. अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी साफ कहा कि किसी भी समझौते का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होना चाहिए कि ईरान कभी परमाणु हथियार न बना सके. उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका किसी भी हालत में इस मुद्दे को नजरअंदाज नहीं कर सकता और हर समझौते में यह प्राथमिकता होनी चाहिए.
बातचीत पर पड़ा असर
इस मतभेद के चलते दोनों देशों के बीच प्रस्तावित बातचीत भी प्रभावित हुई है. इस्लामाबाद में होने वाली बैठक को रद्द कर दिया गया है. बताया जा रहा है कि डोनाल्ड ट्रंप ने अपने दूतों की यात्रा भी रद्द कर दी थी. दूसरी ओर, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने हाल के दिनों में पाकिस्तान, ओमान और रूस का दौरा किया है. इस दौरान उन्होंने व्लादिमीर पुतिन से भी मुलाकात की, जो ईरान के करीबी सहयोगी माने जाते हैं.
खाड़ी क्षेत्र में बढ़ता तनाव और असर
इस टकराव का असर अब वैश्विक बाजारों पर भी दिखने लगा है. खासकर तेल की कीमतों में तेजी आई है. ब्रेंट क्रूड के दाम बढ़ गए हैं क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की संख्या काफी कम हो गई है. जहां पहले हर दिन सैकड़ों जहाज इस रास्ते से गुजरते थे, वहीं अब बहुत कम जहाज ही यहां से निकल पा रहे हैं. कई जहाजों को अमेरिकी रोक के कारण वापस लौटना पड़ा है.
ईरान ने अपने तेल जहाजों को रोके जाने की कार्रवाई को गलत बताते हुए इसे ‘समुद्री लूट’ करार दिया है. साथ ही उसने यह संकेत भी दिया है कि अगर अमेरिका नाकेबंदी हटाता है और संघर्ष खत्म करता है, तो वह होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपनी पकड़ ढीली कर सकता है.


