ट्रंप की सराहना के बीच पाकिस्तान की नई चाल, ईरान तक सामान पहुंचाने का बड़ा प्लान
पाकिस्तान ने ईरान के लिए नए जमीनी व्यापारिक रास्ते खोल दिए हैं, जिससे अमेरिकी नाकेबंदी कमजोर पड़ सकती है. इसी बीच वह अमेरिका-ईरान के बीच मध्यस्थ की भूमिका भी निभा रहा है, जिससे उसकी रणनीति चर्चा में है.

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान की भूमिका अचानक सुर्खियों में आ गई है. एक तरफ वह खुद को दोनों देशों के बीच शांति स्थापित करने वाला मध्यस्थ बता रहा है, वहीं दूसरी ओर ऐसे कदम उठा रहा है जो अमेरिकी रणनीति को कमजोर कर सकते हैं. हालात ऐसे बन रहे हैं कि पाकिस्तान की नीति दोहरी दिखाई दे रही है- बातचीत में सहयोग और जमीन पर अलग खेल.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की तारीफ कर रहे हैं, खासकर ईरान के साथ संभावित युद्धविराम को लेकर. लेकिन इसी दौरान पाकिस्तान ने ऐसा कानूनी रास्ता तैयार कर लिया है, जिससे ईरान तक सामान पहुंचाने में आसानी हो सके, भले ही समुद्री रास्तों पर अमेरिकी दबाव बना हुआ हो.
पाकिस्तान का नया कदम क्या है?
पाकिस्तान ने “ट्रांजिट ऑफ गुड्स थ्रू टेरिटरी ऑफ पाकिस्तान ऑर्डर 2026” नाम से एक नया फ्रेमवर्क लागू किया है. इस व्यवस्था के तहत अब दूसरे देशों का सामान पहले पाकिस्तान आएगा और फिर वहां से जमीन के रास्ते ईरान भेजा जाएगा. इससे समुद्री नाकेबंदी का असर काफी हद तक कम किया जा सकता है. यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब अमेरिका ईरान को आर्थिक रूप से अलग-थलग करने की कोशिशों में जुटा हुआ है. पाकिस्तान के इस कदम से ईरान को राहत मिल सकती है और अमेरिकी रणनीति को चुनौती भी.
अमेरिकी प्रतिबंध और बढ़ता दबाव
इसी बीच अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने ईरान पर नए प्रतिबंधों की घोषणा की है. “ऑपरेशन इकोनॉमिक फ्यूरी” के तहत 14 लोगों और संस्थाओं को निशाना बनाया गया है. यह अभियान करीब 60 दिनों का बताया जा रहा है, जिसका उद्देश्य ईरान को वैश्विक वित्तीय प्रणाली से काटना है. हालांकि, पाकिस्तान के नए ट्रांजिट सिस्टम से इन प्रतिबंधों का असर कम हो सकता है, क्योंकि अब सामान समुद्री रास्ते के बजाय जमीनी रास्ते से ईरान पहुंचाया जा सकेगा.
वार्ता में रुकावट और बदलते संकेत
अमेरिका-ईरान युद्धविराम को लेकर बातचीत का दूसरा दौर प्रस्तावित था, जिसमें अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल को इस्लामाबाद जाना था. लेकिन यह यात्रा अचानक रद्द कर दी गई. ट्रंप ने इसका कारण ईरान के भीतर चल रही “आंतरिक अस्थिरता और भ्रम” बताया. उसी दिन पाकिस्तान के वाणिज्य मंत्रालय ने SRO 691(I)/2026 जारी कर दिया, जिसमें नए ट्रांजिट कॉरिडोर की जानकारी दी गई. इससे यह संकेत मिला कि पाकिस्तान अपने आर्थिक और रणनीतिक हितों को ध्यान में रखते हुए तेजी से फैसले ले रहा है.
ईरान को कैसे मिल रही राहत?
कराची बंदरगाह पर करीब 3,000 कंटेनर फंसे हुए थे, जो ईरान जाने वाले थे. अमेरिकी दबाव के कारण ये कंटेनर आगे नहीं बढ़ पा रहे थे. लेकिन अब नए जमीनी रास्तों के खुलने से इन सामानों को आसानी से ईरान भेजा जा सकेगा. इससे ईरान को जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति जारी रखने में मदद मिलेगी और वह पूरी तरह अलग-थलग नहीं पड़ेगा.
विशेषज्ञों की राय
कुछ विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान इस पूरे मामले में बेहद चालाकी से काम कर रहा है. वह एक तरफ अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है, तो दूसरी तरफ ऐसे रास्ते खोल रहा है जो ईरान को आर्थिक राहत देते हैं. अमेरिकी सेना के पूर्व अधिकारी लॉरेंस सेलिन ने भी कहा कि पाकिस्तान अप्रत्यक्ष रूप से ईरान को अमेरिकी नाकेबंदी से बचने में मदद कर रहा है. उनके मुताबिक यह स्थिति अमेरिका के लिए चिंता का विषय हो सकती है.
पाकिस्तान की दोहरी रणनीति
विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि पाकिस्तान शायद अकेला ऐसा देश है जो एक साथ कई भूमिकाएं निभा रहा है—मध्यस्थ, सहयोगी और रणनीतिक खिलाड़ी. वह सऊदी अरब जैसे देशों से आर्थिक सहयोग भी ले रहा है और ईरान के साथ व्यापारिक संबंध भी मजबूत कर रहा है. बताया जा रहा है कि आर्मी चीफ आसिम मुनीर बैक-चैनल बातचीत को भी संभाल रहे हैं और उन्हीं की देखरेख में ये नए ट्रांजिट कॉरिडोर भी तैयार किए गए हैं.
छह नए ट्रांजिट कॉरिडोर
पाकिस्तान ने ईरान के साथ व्यापार को आसान बनाने के लिए छह प्रमुख मार्ग तय किए हैं:
1. ग्वादर से गब्द (पाकिस्तान-ईरान सीमा)
2. कराची/पोर्ट कासिम से लियारी, ओरमारा, पसनी होते हुए गब्द
3. कराची/पोर्ट कासिम से खुजदार, दलबंदीन होते हुए ताफ्तान
4. ग्वादर से तुर्बत, होशाब, पंजगुर, नाग, बेसिमा, खुजदार, क्वेटा, दलबंदीन, नोकुंडी होते हुए ताफ्तान
5. ग्वादर से लियारी, खुजदार, क्वेटा, दलबंदीन, नोकुंडी होते हुए ताफ्तान
6. कराची/पोर्ट कासिम से ग्वादर होते हुए गब्द


