'सरके चुनरी तेरी' विवाद में फंसे संजय दत्त ने NCW के सामने मांगी माफी, 50 आदिवासी लड़कियों की पढ़ाई का खर्च उठाने का किया ऐलान
'सरके चुनरी तेरी' गाने को लेकर विवाद बढ़ने के बाद संजय दत्त ने NCW से माफी मांग ली है. इसके अलावा उन्होंने वादा किया है कि 50 आदिवासी लड़कियों की पढ़ाई का पूरा खर्च उठाएंगे.

नई दिल्ली: बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता संजय दत्त ने विवादित गाने 'सरके चुनरी तेरी' को लेकर राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) के सामने बिना किसी शर्त के माफी मांग ली है. साथ ही उन्होंने 50 आदिवासी लड़कियों की पढ़ाई का पूरा खर्च उठाने का वादा भी किया है. यह सुनवाई सोमवार को हुई, जिसमें संजय दत्त खुद आयोग के समक्ष पेश हुए.
सुनवाई में क्या हुआ?
आयोग की बैठक में संजय दत्त ने गाने से जुड़ी आपत्तियों को स्वीकार किया. उनके वकील ने बताया कि मूल गाना कन्नड़ भाषा में था. बाद में इसे हिंदी में डब किया गया, जिसकी जानकारी उन्हें नहीं थी. अभिनेता ने लिखित शपथपत्र देकर माफी मांगी और समाज पर पड़े नकारात्मक प्रभाव के लिए खेद जताया.
NCW की अध्यक्ष विजया के. रहाटकर ने गाने के बोलों पर सख्त नाराजगी जताई. उन्होंने कहा कि रचनात्मकता के नाम पर महिलाओं की गरिमा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता. ऐसे गीत महिलाओं को गलत तरीके से दिखाते हैं और समाज में गलत संदेश देते हैं.
पहले की सुनवाई
इससे पहले 6 अप्रैल को हुई बैठक में नोरा फतेही खुद नहीं पहुंची थी. उनकी तरफ से वकील पेश हुए, लेकिन आयोग ने इसे स्वीकार नहीं किया और अभिनेत्री को व्यक्तिगत रूप से आने का अंतिम मौका दिया. गीतकार रकीब आलम, निर्देशक प्रेम और प्रोडक्शन कंपनी के लोग भी पेश हुए. उन्होंने लिखित माफी दी और महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए काम करने का भरोसा दिया.
विवाद की वजह
कन्नड़ फिल्म 'केडी: द डेविल' का यह गाना रिलीज होते ही सोशल मीडिया पर भारी आलोचना का शिकार बना. लोगों ने इसके बोलों को अश्लील और आपत्तिजनक बताया. बढ़ते विरोध के बाद गाने को यूट्यूब से हटा दिया गया. NCW ने स्वतः संज्ञान लेते हुए सभी संबंधित लोगों को समन भेजा था. आयोग का मानना है कि ऐसे कंटेंट महिलाओं की इज्जत को ठेस पहुंचाता है.
संजय दत्त का सकारात्मक कदम
संजय दत्त का यह फैसला सराहनीय माना जा रहा है. 50 आदिवासी बालिकाओं की शिक्षा का खर्च उठाने का वादा न सिर्फ माफी को सार्थक बनाता है, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव की दिशा में एक छोटा कदम भी है. फिल्म इंडस्ट्री में रचनाकारों को अब सतर्क रहने की जरूरत है.
महिलाओं की गरिमा का सम्मान करते हुए मनोरंजन देना ही सच्ची रचनात्मकता है. उम्मीद है कि यह घटना भविष्य में ऐसी गलतियों को रोकने में मदद करेगी.


