अमेरिका ने भारत समेत 16 देशों को निशाने पर लिया, शुरू की नई जांच, कई देशों पर लटकी तलवार
ट्रंप ने एक बड़ा ऐलान किया है कि अनुचित व्यापार, डंपिंग और जबरन मजदूरी के आरोप में भारत, चीन, यूरोपीय संघ समेत करीब 60 देशों के खिलाफ नई जांच शुरू हो गई है. क्या होगा असर? जिससे इन देशों पर नए-नए टैरिफ और भारी जुर्माने का खतरा मंडराने लगा है.

नई दिल्ली: ट्रंप प्रशासन ने 16 प्रमुख व्यापारिक साझेदार देशों के खिलाफ अनुचित व्यापारिक नीतियों और प्रथाओं की नई जांच शुरू की है, जिससे भारत, चीन, यूरोपीय संघ सहित कई अर्थव्यवस्थाओं पर नए टैरिफ और अन्य प्रतिबंध लगने की संभावना मजबूत हो गई है. यह कदम सुप्रीम कोर्ट द्वारा ट्रंप के पहले के टैरिफ को असंवैधानिक घोषित करने के बाद उठाया गया है, जिसके चलते प्रशासन अब सेक्शन 301 के तहत नए जांच प्रक्रिया से टैरिफ व्यवस्था को पुनः स्थापित करने की कोशिश कर रहा है.
इस जांच से वैश्विक व्यापार संबंधों में नया तनाव पैदा हो सकता है, क्योंकि अमेरिका का आरोप है कि इन देशों में औद्योगिक क्षमता घरेलू मांग से कहीं अधिक है, जिससे ओवरप्रोडक्शन हो रहा है और अमेरिकी उद्योगों को नुकसान पहुंच रहा है. अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर ने स्पष्ट किया कि इस गर्मी तक कई देशों पर नए टैरिफ लगाए जा सकते हैं, जबकि जबरन मजदूरी से जुड़ी दूसरी जांच लगभग 60 देशों को प्रभावित करेगी.
जांच के दायरे में शामिल 16 प्रमुख देश
सेक्शन 301 जांच मुख्य रूप से संरचनात्मक अतिरिक्त क्षमता और उत्पादन पर केंद्रित है. इसमें चीन, यूरोपीय संघ, भारत, जापान, दक्षिण कोरिया, मैक्सिको, ताइवान, वियतनाम, थाइलैंड, मलेशिया, कंबोडिया, सिंगापुर, इंडोनेशिया, बांग्लादेश, स्विट्जरलैंड और नॉर्वे शामिल हैं. अमेरिका के दूसरे सबसे बड़े व्यापारिक साझेदार कनाडा को इस जांच से बाहर रखा गया है.
दो अलग-अलग जांचों का ऐलान
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर ने मीडिया के हवाले से बताया कि ट्रंप प्रशासन दो अलग-अलग जांचें शुरू कर रहा है. पहली जांच जरूरत से ज्यादा उत्पादन पर केंद्रित है, जबकि दूसरी जांच जबरन मजदूरी से बने सामानों के आयात को लेकर है. उन्होंने कहा कि इस गर्मियों तक चीन, यूरोपीय संघ, भारत, जापान, दक्षिण कोरिया और मैक्सिको के खिलाफ नए टैरिफ लगाए जा सकते हैं. इस सूची में ताइवान, वियतनाम, थाइलैंड, मलेशिया, कंबोडिया, सिंगापुर, इंडोनेशिया, बांग्लादेश, स्विट्जरलैंड और नॉर्वे भी शामिल हैं.
अमेरिकी रुख और मजबूत चेतावनी
अपने रुख को स्पष्ट करते हुए ग्रीर ने कहा- हमें अमेरिकी नौकरियों की रक्षा करनी है और हमें यह सुनिश्चित करने की सख्त जरूरत है कि हमारे व्यापारिक साझेदारों के साथ हमारा व्यापार पूरी तरह से निष्पक्ष हो. उन्होंने सीधे तौर पर चेतावनी देते हुए कहा- अगर इस समस्या को हल करने के लिए हमें टैरिफ लगाने की जरूरत पड़ी, तो हम ऐसा जरूर करेंगे. हालांकि, ग्रीर ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि भविष्य में लगाए जाने वाले संभावित जुर्माने या टैरिफ अलग-अलग देशों के लिए अलग-अलग होंगे या एक समान.
जबरन मजदूरी जांच का विस्तार
जबरन मजदूरी को लेकर जो दूसरी जांच की जा रही है, उसके बारे में ग्रीर ने बताया कि यह जांच कल दोपहर के बाद किसी भी समय शुरू हो सकती है. इस जांच की जद में लगभग 60 व्यापारिक साझेदार देश आएंगे, जिससे ग्लोबल सप्लाई चैन पर व्यापक असर पड़ सकता है. अमेरिका ने पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन द्वारा हस्ताक्षरित 'उइगर फोर्ड लेबर प्रोटेक्शन एक्ट' के तहत पहले ही चीन के शिनजियांग क्षेत्र से आने वाले सोलर पैनल और अन्य सामानों पर कार्रवाई की है. अमेरिका का आरोप है कि चीन ने उइगर और अन्य मुस्लिम अल्पसंख्यकों के लिए लेबर कैंप बनाए हैं (हालांकि चीन इन आरोपों से इनकार करता है). अब इस जांच का दायरा अन्य देशों तक भी बढ़ाया जा सकता है.
चीन और अन्य देशों के उदाहरण
ग्रीर के अनुसार, चीन की इलेक्ट्रिक वाहन उत्पादन क्षमता उसकी घरेलू मांग से कहीं अधिक है. फिर भी, वहां की शीर्ष ईवी निर्माता कंपनी BYD आक्रामक रूप से उज्बेकिस्तान, थाइलैंड, ब्राजील, हंगरी और तुर्की में अपने कारखाने स्थापित कर रही है और यूरोप में भी विस्तार करने की योजना बना रही है. जर्मनी और आयरलैंड के बड़े व्यापार अधिशेष को यूरोपीय संघ की अतिरिक्त क्षमता का सबूत माना गया है. इसके अलावा, अमेरिका के साथ व्यापार घाटे के बावजूद सिंगापुर में सेमीकंडक्टर की अतिरिक्त वैश्विक क्षमता है, और नॉर्वे में ईंधन व समुद्री भोजन के भारी निर्यात को इसका सबूत माना गया है.
ट्रंप-शी जिनपिंग बैठक से पहले रणनीतिक कदम
ट्रंप प्रशासन का यह ताजा व्यापारिक कदम रणनीतिक रूप से भी काफी अहम है. यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है, जब अप्रैल महीने में बीजिंग में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक प्रस्तावित है. इस नई जांच का असर दोनों नेताओं की आगामी बातचीत पर भी देखने को मिल सकता है.


