नई दिल्ली: चीन को संतुलित करने की अपनी दीर्घकालिक रणनीति के तहत अमेरिका अब भारत की भूमिका का विस्तृत आकलन करने जा रहा है. वॉशिंगटन स्थित यूएस-चीन इकोनॉमिक एंड सिक्योरिटी रिव्यू कमीशन (USCC) इस सप्ताह 2026 के अपने पहले सार्वजनिक सत्र की शुरुआत करेगा, जिसमें भारत की रणनीतिक स्थिति और क्षेत्रीय भूमिका पर विशेष ध्यान दिया जाएगा.
इस सुनवाई में भारत की सैन्य क्षमता, चीन और अमेरिका के साथ उसके संबंधों, और बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों की गहन समीक्षा होगी. खास तौर पर यह देखा जाएगा कि अमेरिका-चीन-भारत के त्रिकोणीय संबंध किस दिशा में बढ़ रहे हैं और इसमें भारत की भूमिका कैसे आकार ले रही है.
यूएससीसी की इस सुनवाई का मुख्य फोकस भारत की रणनीतिक अहमियत पर होगा. इसमें भारत-चीन सीमा विवाद, हिंद महासागर में समुद्री पहुंच और बढ़ती प्रतिस्पर्धा, तथा इंडो-पैसिफिक सुरक्षा ढांचे में भारत की भूमिका जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा की जाएगी.
यह समीक्षा ऐसे समय हो रही है, जब भारत और चीन के रिश्तों में सीमित नरमी के संकेत सामने आए हैं.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सात वर्षों बाद बीजिंग यात्रा, पांच साल बाद भारत-चीन के बीच हवाई सेवाओं की बहाली और गलवान झड़प के बाद चीनी कंपनियों के लिए भारतीय निवेश मार्ग का आंशिक रूप से खुलना इसी नरमी की ओर इशारा करता है.
आयोग इन घटनाक्रमों को भारत के रणनीतिक रुख में संभावित बदलाव के तौर पर देख रहा है.
पीएम मोदी की हालिया बीजिंग यात्रा और गलवान गतिरोध के बाद चीनी कंपनियों को भारतीय बाजार में दी गई सीमित ढील को अमेरिकी अधिकारी “भारत के रुख में बदलाव” के रूप में देख रहे हैं.
आयोग यह भी परखेगा कि चीन के साथ भारत का यह जुड़ाव अमेरिका के आर्थिक और राष्ट्रीय सुरक्षा हितों को किस हद तक प्रभावित कर सकता है.
अमेरिका भारत की आत्मनिर्भरता को अपनी दीर्घकालिक सुरक्षा रणनीति के लिहाज से अहम मानता है. एआई (AI), सेमीकंडक्टर और फार्मा जैसे क्षेत्रों में भारत की बढ़ती क्षमता को वॉशिंगटन रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मान रहा है.
सुनवाई में यह भी आकलन किया जाएगा कि इन क्षेत्रों में भारत की प्रगति अमेरिका-भारत रणनीतिक साझेदारी को कैसे मजबूत कर सकती है.
बीते एक साल में वॉशिंगटन और नई दिल्ली के संबंधों में आई कुछ खटास ने अमेरिकी नीति निर्माताओं के बीच भारत की रणनीतिक स्वायत्तता को लेकर नए सवाल खड़े किए हैं.
अमेरिका यह समझने की कोशिश कर रहा है कि भारत किस हद तक स्वतंत्र रणनीतिक फैसले ले रहा है और यह रुख चीन को लेकर अमेरिकी नीति से कितना मेल खाता है.
यह सुनवाई ऐसे समय में हो रही है, जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अप्रैल 2026 में चीन की राजकीय यात्रा पर जाने वाले हैं. ऐसे में भारत की भूमिका पर यह समीक्षा अमेरिका की कूटनीतिक संतुलन नीति के लिए बेहद अहम मानी जा रही है. First Updated : Friday, 30 January 2026