Donald Trump: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस पर प्रतिबंधों को लेकर एक बड़ा बयान दिया है. उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका रूस के खिलाफ और कड़े प्रतिबंध लगाने को तैयार है, लेकिन इसके लिए यूरोपीय देशों को भी उसी तरह का कड़ा रवैया अपनाना होगा जैसा अमेरिका ने दिखाया है. ट्रंप ने यूरोप की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि वह अब भी रूस से तेल खरीद रहा है, जिससे प्रतिबंधों का प्रभाव कम हो रहा है. ट्रंप ने न केवल यूरोपीय यूनियन को कठघरे में खड़ा किया, बल्कि NATO और G7 देशों को भी सख्त कार्रवाई के लिए तैयार रहने को कहा. उनका मानना है कि रूस को आर्थिक रूप से कमजोर करने के लिए सभी देशों को एकजुट होकर ठोस फैसले लेने होंगे. उन्होंने चीन पर भी भारी टैरिफ लगाने की मांग की ताकि रूस पर उसका असर कम किया जा सके.
डोनाल्ड ट्रंप ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि यूरोप अब भी रूस से तेल खरीद रहा है मैं नहीं चाहता कि वे ऐसा करें. जो प्रतिबंध यूरोप लगा रहा है, वह पर्याप्त नहीं हैं. मैं तो प्रतिबंध लगाने को तैयार हूं, लेकिन यूरोप को अपने प्रतिबंध अमेरिका के अनुरूप सख्त करने होंगे. यदि यूरोप रूस के खिलाफ एकजुट नहीं होता, तो अमेरिकी प्रयास अधूरे रह जाएंगे.
ट्रंप ने NATO देशों को चेताया कि यदि रूस से तेल की खरीद जारी रही तो आर्थिक प्रतिबंधों का कोई असर नहीं होगा. उन्होंने सभी सदस्य देशों से रूस के खिलाफ निर्णायक और ठोस कदम उठाने का अनुरोध किया. साथ ही ट्रंप ने चीन पर भी बड़ा बयान देते हुए कहा कि मेरा मानना है कि नाटो समेत अन्य देश मिलकर चीन पर 50 से 100 प्रतिशत टैरिफ लगाएं. ये टैरिफ तब तक लागू रहने चाहिए जब तक रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म नहीं हो जाता.
ट्रंप प्रशासन के तहत अमेरिका ने G7 देशों से आग्रह किया कि वे उन देशों पर भी टैरिफ लगाएं जो रूस से तेल खरीद रहे हैं. अमेरिका ने खासतौर पर भारत और चीन का उल्लेख करते हुए उन्हें रूस के युद्ध प्रयासों में अप्रत्यक्ष सहयोगी बताया. G7 के वित्त मंत्रियों के साथ बातचीत के दौरान अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट और व्यापार प्रतिनिधि जेमीसन ग्रीर ने कहा कि सिर्फ एकजुट प्रयास से ही रूस के युद्ध के लिए धन प्रवाह को रोक सकते हैं. तभी हम पर्याप्त आर्थिक दबाव डाल पाएंगे और इस युद्ध को समाप्त कर पाएंगे.
वर्तमान में G7 की अध्यक्षता कर रहे ओटावा ने भी साफ किया है कि सभी सदस्य देश मिलकर रूस पर दबाव बढ़ाएंगे. इसके साथ ही वे यूक्रेन की दीर्घकालीन आर्थिक पुनर्प्राप्ति सुनिश्चित करने के लिए भी एक व्यापक रणनीति तैयार करेंगे. यह संकेत है कि आने वाले समय में रूस पर वैश्विक आर्थिक दबाव और अधिक बढ़ सकता है. First Updated : Monday, 15 September 2025