क्या है कुद्स डे, जिसकी रैली में 'अमेरिका-इजरायल मुर्दाबाद' के नारे लगते ही धमाका हुआ? भारत में भी हुए प्रदर्शन

आज कुद्स डे के मौके पर इजरायल ने ईरान में धमाका किया, जिससे एक महिला की मौत की खबर सामने आई है. भारत में भी आज रैली प्रदर्शन देखने को मिल रहे हैं.

Sonee Srivastav

नई दिल्ली: कुद्स डे एक अंतरराष्ट्रीय दिवस है, जो हर साल रमजान के आखिरी शुक्रवार को मनाया जाता है. इसका मुख्य मकसद फिलिस्तीन के लोगों के साथ एकजुटता दिखाना और इजरायल के कब्जे का विरोध करना है.

'कुद्स' शब्द जेरूसलम शहर का अरबी नाम है, जो मुसलमानों, ईसाइयों और यहूदियों के लिए पवित्र स्थल है. यह दिन दुनिया भर में फिलिस्तीन की आजादी की आवाज बुलंद करने का मौका देता है.

कुद्स डे की शुरुआत कैसे हुई?

इस दिवस की नींव 1979 में ईरान की इस्लामी क्रांति के दौरान आयतुल्लाह रूहोल्लाह खुमैनी ने रखी. उन्होंने घोषणा की कि रमजान के अंतिम जुमे को 'अंतरराष्ट्रीय कुद्स दिवस' के रूप में मनाकर मुसलमान फिलिस्तीन के संघर्ष को समर्थन दें.

शुरू में ईरान में शुरू हुआ यह कार्यक्रम अब भारत, पाकिस्तान, इराक और कई अन्य देशों में फैल चुका है. यहां लोग रैलियां निकालकर फिलिस्तीन के हक की बात करते हैं.

ईरान में रैली पर इजरायल का हमला

ईरान में इस साल भी कुद्स डे पर तेहरान में बड़ी रैली निकाली गई, जहां लोग 'अमेरिका मुर्दाबाद' और 'इजरायल मुर्दाबाद' के नारे लगा रहे थे. रैली में ईरान के मंत्री अली लारीजानी भी शामिल थे. इसी दौरान इजरायल ने कथित तौर पर हमला किया. ईरानी मीडिया इरना के अनुसार, इस घटना में एक महिला की मौत हो गई. हालांकि, कुछ रिपोर्ट्स में किसी की मौत की पुष्टि नहीं हुई है. 

लारीजानी ने हमले की निंदा करते हुए कहा कि इजरायल की ये हरकतें उसकी मजबूरी दिखाती हैं, लेकिन ईरानी लोग कभी पीछे नहीं हटेंगे. पिछले सालों में भी ऐसी घटनाएं हुई हैं.1985 में कुद्स डे रैली पर हमले में 78 लोग मारे गए थे, जबकि 2017 में लंदन की रैली में एक बुजुर्ग की मौत हुई थी. 

भारत में कुद्स डे पर प्रदर्शन

भारत में भी कुद्स डे को लेकर कई शहरों में शांतिपूर्ण प्रदर्शन हुए. कश्मीर, लद्दाख, लखनऊ, दिल्ली, बेंगलुरु, हैदराबाद और अलीपुर जैसे इलाकों में मस्जिदों के बाहर लोग जमा हुए.

उन्होंने फिलिस्तीन की आजादी की मांग की और मासूमों के साथ खड़े होने के नारे लगाए. साथ ही, अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमलों की कड़ी आलोचना की. ये प्रदर्शन रमजान के पवित्र महीने में तनाव के बीच एकजुटता का प्रतीक बने.

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