‘शुक्रिया पीएम मोदी…’ अमेरिका में क्यों झुकें पाकिस्तानी आर्मी चीफ? ऑपरेशन सिंदूर का असर

विरोधाभास देखिए, एक तरफ मुनीर भारत को सैन्य टकराव की धमकी देते हैं, दूसरी तरफ शांति की बातें भी करते हैं. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान 'सभ्य देशों' की तरह बातचीत चाहता है, लेकिन साथ ही जोड़ दिया कि हम अपमान नहीं, शहादत चुनना पसंद करेंगे. यही पाकिस्तान की दोहरी नीति है.

Dimple Yadav
Edited By: Dimple Yadav

पाकिस्तान के आर्मी चीफ जनरल आसिम मुनीर इन दिनों पांच दिवसीय अमेरिका दौरे पर हैं और उनके बयानों ने एक बार फिर भारत-पाक संबंधों की जटिलता को उजागर कर दिया है. वॉशिंगटन में पाकिस्तानी समुदाय को संबोधित करते हुए जनरल मुनीर ने भारत के प्रति पुरानी कटुता दोहराई, लेकिन साथ ही कुछ ऐसे संकेत भी दिए, जो पाकिस्तानी फौज की रणनीतिक उलझन को दर्शाते हैं.

मुनीर ने कहा कि भारत ‘न्यू नॉर्मल’ की नीति अपना रहा है, जिसमें सीमाओं का उल्लंघन कर सैन्य कार्रवाई की जाती है. उन्होंने दावा किया कि भारत ने पहलगाम हमले का बहाना बनाकर पाकिस्तान के अंदर हमले किए. हालांकि, सच्चाई यह है कि पहलगाम हमले की जिम्मेदारी पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन 'द रेजिस्टेंस फ्रंट' ने ली थी, जिससे भारत के आरोप मजबूत हुए.

पाकिस्तान के आर्मी चीफ का अमेरिका में नमस्ते-मोदी मोमेंट

जनरल मुनीर ने भारत को एक ओर चेतावनी दी कि पाकिस्तान अपमान नहीं, बल्कि शहादत को तरजीह देगा. वहीं दूसरी ओर उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान भारत से शांति चाहता है और दोनों देशों को मतभेदों को 'सभ्य देशों' की तरह सुलझाना चाहिए. यह विरोधाभास पाकिस्तान की उस रणनीति की ओर इशारा करता है, जिसमें एक साथ सख्ती और संवाद दोनों को साधने की कोशिश होती है.

जनरल मुनीर ने क्यों किया मोदी का ज़िक्र

सबसे चौंकाने वाला बयान तब आया जब मुनीर ने अप्रत्यक्ष रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद दे डाला. उन्होंने कहा कि भारत की कार्रवाई से पाकिस्तान एकजुट हुआ है. इतना ही नहीं, उन्होंने 1970 के दशक के 'शांतिपूर्ण पाकिस्तान' को याद किया, जहां विदेशी पर्यटक आते थे और समाज में सांप्रदायिक सौहार्द था. यह एक ऐसे पाकिस्तान की छवि गढ़ने की कोशिश थी, जो अंतरराष्ट्रीय समुदाय को आज असंभव सी लगती है.

अमेरिका में पाक की नई चाल या मजबूरी

बुधवार को जनरल मुनीर की मुलाकात पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से तय है. माना जा रहा है कि इस लंच मीटिंग में ईरान-इजरायल तनाव और पाकिस्तान की भूमिका पर चर्चा हो सकती है. खासतौर पर अमेरिकी अभियानों में पाकिस्तान की संभावित भूमिका पर बात हो सकती है.

अमेरिका में चला ‘सिंदूर’ का जादू

जनरल मुनीर की यह यात्रा और उनके बयानों का दोहरा स्वरूप यह स्पष्ट करता है कि पाकिस्तान एक तरफ अमेरिका को संतुलित सहयोगी दिखना चाहता है, तो दूसरी तरफ भारत के प्रति अपनी पुरानी नीति को भी नहीं छोड़ रहा. अब देखना होगा कि ट्रंप से उनकी मुलाकात किस दिशा में आगे बढ़ती है.

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