क्या खत्म होगा ईरान-अमेरिका युद्ध? ट्रंप ने ऊर्जा स्थलों पर 10 दिनों के लिए रोके हमले
अमेरिका ने ईरान के अनुरोध पर उसके ऊर्जा ढांचे पर हमले 10 दिनों के लिए रोक दिए हैं. यह फैसला जारी तनाव के बीच बातचीत और कूटनीति को मौका देने के संकेत देता है, हालांकि स्थिति अभी भी अनिश्चित बनी हुई है.

नई दिल्ली: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने अचानक नरमी दिखाते हुए ईरान के ऊर्जा ढांचे पर हमले फिलहाल रोकने का फैसला किया है. इस कदम को संभावित कूटनीतिक पहल की दिशा में एक बड़ी शुरुआत माना जा रहा है. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि ईरान के अनुरोध पर ऊर्जा से जुड़े ठिकानों पर हमले 10 दिनों के लिए रोक दिए जाएंगे. यह रोक 6 अप्रैल 2026 तक प्रभावी रहेगी.
ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए कहा कि यह फैसला बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए लिया गया है. ट्रंप के अनुसार, दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है और इसमें सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं. उन्होंने यह भी कहा कि मीडिया में जो खबरें आ रही हैं, उनमें कई बातें गलत तरीके से पेश की जा रही हैं.
कूटनीति के लिए खुला रास्ता
विशेषज्ञों का मानना है कि यह अस्थायी विराम दोनों देशों के बीच बातचीत के लिए रास्ता खोल सकता है. पिछले कुछ हफ्तों से अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के अहम ऊर्जा और तेल ढांचे को निशाना बनाया जा रहा था. इन हमलों का मकसद ईरान की सैन्य और आर्थिक ताकत को कमजोर करना बताया गया था.
इन हमलों के जवाब में ईरान ने भी कड़ा रुख अपनाया. उसने क्षेत्र में कई जगह मिसाइल और ड्रोन हमले किए, जिनमें अमेरिकी ठिकानों और उनके सहयोगियों के इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया गया. इससे हालात और ज्यादा बिगड़ गए और पूरा क्षेत्र बड़े युद्ध के खतरे की ओर बढ़ता नजर आया.
क्या यह स्थायी युद्धविराम बनेगा?
फिलहाल यह साफ नहीं है कि यह 10 दिनों का विराम स्थायी शांति की दिशा में कदम होगा या सिर्फ तनाव को अस्थायी रूप से कम करने की कोशिश. ट्रंप ने अपने बयान में यह नहीं बताया कि आगे इस विराम को बढ़ाने के लिए क्या शर्तें होंगी. हालांकि, ईरान के अनुरोध का जिक्र यह संकेत देता है कि दोनों देशों के बीच किसी स्तर पर बातचीत हो रही है.
पहले दी थी सख्त चेतावनी
इससे पहले 22 मार्च को ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी थी. उन्होंने कहा था कि अगर 48 घंटे के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा नहीं खोला गया, तो अमेरिका ईरान के ऊर्जा ढांचे पर बड़े हमले करेगा. उन्होंने यह भी कहा था कि जरूरत पड़ी तो बड़े बिजली संयंत्रों को भी निशाना बनाया जाएगा. लेकिन इसके अगले ही दिन रुख बदलते हुए उन्होंने हमलों को 5 दिनों के लिए टालने का ऐलान किया. ट्रंप ने इसे “सकारात्मक बातचीत” का नतीजा बताया, जबकि ईरान ने इसे अमेरिका की नरमी और दबाव में लिया गया फैसला बताया.
मौजूदा हालात में यह विराम एक अहम मौका साबित हो सकता है, जहां दोनों देश सीधे या परोक्ष रूप से बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश कर सकते हैं. हालांकि, आने वाले दिन ही तय करेंगे कि यह कदम स्थायी शांति की ओर बढ़ेगा या फिर तनाव एक बार फिर बढ़ेगा.


