क्या खत्म होने जा रहा है रूस-यूक्रेन युद्ध? जेलेंस्की ने पुतिन को लिखा खुला पत्र, बातचीत के लिए सुझाए ये 3 बड़े देश
रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच राष्ट्रपति जेलेंस्की ने पुतिन को खुला पत्र लिखकर तटस्थ देशों में सीधी बातचीत का प्रस्ताव दिया है. उन्होंने युद्धविराम, कैदियों की अदला-बदली और शांति वार्ता की मांग करते हुए रूस पर युद्ध लंबा खींचने का आरोप लगाया.

नई दिल्ली: रूस और यूक्रेन के बीच पिछले चार साल से जारी युद्ध के बीच अब शांति की उम्मीद की एक नई किरण दिखाई दी है. यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को खुला पत्र लिखकर आमने-सामने बातचीत का प्रस्ताव दिया है. खास बात यह है कि लंबे समय से जारी इस संघर्ष में पहली बार जेलेंस्की ने खुलकर सीधे वार्ता की बात कही है.
तटस्थ देशों में बातचीत का प्रस्ताव
जेलेंस्की ने अपने पत्र में कहा कि बातचीत किसी तटस्थ देश में होनी चाहिए. उन्होंने इसके लिए स्विट्जरलैंड, तुर्किए और अरब देशों के नाम सुझाए. उनका कहना है कि बातचीत ना तो मॉस्को में होनी चाहिए और ना ही कीव में.
उन्होंने जोर देकर कहा कि युद्ध जैसे बड़े मुद्दों का समाधान दोनों देशों के शीर्ष नेताओं की सीधी बातचीत से ही संभव है. उन्होंने पुतिन से अपील की कि जल्द से जल्द बातचीत की तारीख तय की जाए ताकि युद्ध को खत्म करने की दिशा में कदम बढ़ सके.
अमेरिका पर निर्भर रहने से नहीं बनेगी बात
यूक्रेनी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि केवल अमेरिका के समर्थन का इंतजार करते रहने से हालात नहीं बदलेंगे. उनके मुताबिक इस समय अमेरिका का ध्यान ईरान और पश्चिम एशिया की स्थिति पर ज्यादा केंद्रित है. ऐसे में रूस और यूक्रेन को खुद आगे बढ़कर समाधान निकालना होगा.
रूस पर लगाए गंभीर आरोप
जेलेंस्की ने आरोप लगाया कि रूस को जमीनी लड़ाई में अपेक्षित सफलता नहीं मिल रही है, इसलिए वह बैलिस्टिक मिसाइलों का ज्यादा इस्तेमाल कर रहा है. उन्होंने दावा किया कि रूस इस युद्ध को लंबा खींचना चाहता है ताकि किसी तरह रणनीतिक फायदा हासिल किया जा सके.
उन्होंने यह भी कहा कि रूस बेलारूस को भी इस संघर्ष में शामिल करने की कोशिश कर रहा है. साथ ही मोल्दोवा के ट्रांसनिस्ट्रिया इलाके में तनाव बढ़ाने की साजिश रची जा रही है.
युद्धविराम और कैदियों की अदला-बदली की मांग
जेलेंस्की ने साफ कहा कि किसी भी बातचीत से पहले पूरी तरह युद्धविराम लागू होना चाहिए. इसके साथ ही युद्धबंदियों की अदला-बदली और रूस की जेलों में बंद यूक्रेनी नागरिकों की रिहाई भी जरूरी है.
उन्होंने दावा किया कि लगातार ड्रोन हमलों, महंगाई और ईंधन संकट के कारण रूस आर्थिक दबाव में आ चुका है. हालांकि उन्होंने माना कि इस युद्ध में यूक्रेन को भी भारी नुकसान उठाना पड़ा है.


