गणेश जयंती पर इन नियमों की अनदेखी न करें, छोटी गलती बन सकती है बड़ा दोष

22 जनवरी 2026 को गणेश जयंती का पर्व मनाया जाएगा, जिसमें विधि-विधान और नियमों के साथ भगवान गणेश की पूजा करना विशेष फलदायी माना गया है.

Suraj Mishra
Edited By: Suraj Mishra

हिंदू परंपरा में भगवान गणेश को संकटों का नाश करने वाला और शुभता प्रदान करने वाला देवता माना जाता है. किसी भी मांगलिक कार्य की शुरुआत गणपति पूजन से करने की परंपरा इसी विश्वास से जुड़ी है कि उनके आशीर्वाद से कार्य निर्विघ्न पूर्ण होता है. पंचांग के अनुसार 22 जनवरी 2026 को गणेश जयंती का पावन पर्व मनाया जाएगा. 

शास्त्रों में क्या बताया गया?

यह दिन भगवान गणेश के प्राकट्य का उत्सव है, जिसे श्रद्धा और विधि-विधान के साथ मनाया जाता है. हालांकि शास्त्रों में यह भी बताया गया है कि पूजा के समय कुछ नियमों की अनदेखी करने से शुभ फल की जगह दोष लग सकता है. इसलिए इस दिन विशेष सावधानियां बरतना आवश्यक माना गया है.

गणेश जयंती के दिन कुछ कार्यों से बचने की परंपरा है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माघ मास की चतुर्थी यानी गणेश जयंती पर चंद्रमा के दर्शन करना अशुभ माना जाता है. पौराणिक कथा के अनुसार इस दिन चंद्र दर्शन करने से व्यक्ति को झूठे आरोप या बदनामी का सामना करना पड़ सकता है. इसी तरह भगवान गणेश की पूजा में तुलसी के पत्तों का प्रयोग वर्जित है, क्योंकि उन्हें तुलसी नहीं बल्कि दूर्वा घास अत्यंत प्रिय है.

पूजा स्थल की व्यवस्था पर भी विशेष ध्यान देने की सलाह दी जाती है. पूजा हमेशा प्रकाश में करें और इस बात का ध्यान रखें कि अंधेरा न हो. साथ ही, भगवान गणेश की प्रतिमा या मूर्ति की पीठ की ओर से पूजा करना या दर्शन करना अशुभ माना गया है. इस दिन घर में क्रोध, कलह या वाद-विवाद से दूर रहना चाहिए. मान्यता है कि जिस घर में बड़ों का सम्मान नहीं होता, वहां भगवान गणेश का वास नहीं होता.

गणेश जयंती की पूजा विधि 

गणेश जयंती की पूजा विधि भी विशेष मानी गई है. सुबह स्नान कर स्वच्छ लाल वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें. एक साफ चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर गणेश जी की प्रतिमा स्थापित करें. यदि प्रतिमा धातु की हो तो पंचामृत से अभिषेक करें, जबकि मिट्टी की प्रतिमा पर केवल गंगाजल अर्पित करें. इसके बाद सिंदूर से तिलक लगाएं, 21 दूर्वा की गांठें और लाल फूल अर्पित करें. भगवान गणेश को मोदक या लड्डू का भोग लगाना अत्यंत शुभ माना जाता है.

पूजा के दौरान “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का जाप करने से वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. माघ चतुर्थी के अवसर पर तिल से बने लड्डुओं का विशेष महत्व बताया गया है. अंत में धूप-दीप जलाकर गणेश चालीसा का पाठ करें और आरती के साथ पूजा संपन्न करें.

इस वर्ष गणेश जयंती कई शुभ योगों में मनाई जा रही है. मान्यता है कि इस दिन दान-पुण्य और सच्चे मन से की गई आराधना से जीवन के मानसिक, आर्थिक और बौद्धिक संकट दूर होते हैं. विशेष रूप से विद्यार्थियों के लिए भगवान गणेश की उपासना को बुद्धि, स्मरण शक्ति और एकाग्रता बढ़ाने वाला माना गया है.

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