इबादत और बरकतों का महीना है रमजान, आज से पहला रोजा शुरू
बीती बुधवार की शाम देश के कई हिस्सों में चांद दिखाई देने के साथ ही रमजान की शुरुआत की घोषणा कर दी गई. आज गुरुवार को भारत में रमजान का पहला रोजा रखा गया.

इस्लाम धर्म में रमजान का महीना बेहद पवित्र और बरकतों से भरा माना जाता है. इसे इबादत, संयम और आत्मशुद्धि का महीना कहा जाता है. बीती बुधवार की शाम देश के कई हिस्सों में चांद दिखाई देने के साथ ही रमजान की शुरुआत की घोषणा कर दी गई. दिल्ली सहित उत्तर प्रदेश, बिहार और अन्य राज्यों में लोगों ने चांद देखे जाने की पुष्टि की. इसके बाद आज गुरुवार को भारत में रमजान का पहला रोजा रखा गया.
धार्मिक नेताओं ने की चांद दिखने की पुष्टि
दिल्ली की ऐतिहासिक जामा मस्जिद और फतेहपुरी मस्जिद की हिलाल कमेटियों ने आधिकारिक तौर पर चांद दिखने की पुष्टि की. धार्मिक नेताओं ने बताया कि चांद नजर आने के साथ ही रमजान का पवित्र महीना शुरू हो गया है और अब मुस्लिम समुदाय के लोग पूरे महीने रोजा रखकर इबादत करेंगे. बिहार, झारखंड और ओडिशा में धार्मिक मामलों की देखरेख करने वाली संस्थाओं ने भी कई इलाकों में चांद दिखाई देने की पुष्टि की है.
भारत में रमजान की शुरुआत अक्सर मध्य पूर्व के देशों से एक दिन बाद होती है. इसका कारण चांद दिखाई देने का भौगोलिक अंतर है. इस साल सऊदी अरब, ओमान, कतर और संयुक्त अरब अमीरात में चांद एक दिन पहले नजर आया, जिसके कारण वहां रमजान की शुरुआत बुधवार से ही हो गई थी, जबकि भारत में पहला रोजा गुरुवार से रखा जाएगा.
सूर्योदय से पहले सहरी
रमजान के दौरान रोजा रखने वाले लोग सुबह सूर्योदय से पहले सहरी करते हैं, जो दिनभर के उपवास की तैयारी होती है. सहरी के बाद फज्र की नमाज अदा की जाती है और फिर पूरे दिन खाने-पीने से दूर रहकर इबादत की जाती है. सूर्यास्त के बाद इफ्तार के समय रोजा खोला जाता है. यह समय आध्यात्मिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, जब लोग अल्लाह का शुक्रिया अदा करते हैं और दुआ मांगते हैं.
पहले रोजे के दिन सहरी का समय सुबह लगभग 5:30 बजे तक और इफ्तार का समय शाम करीब 6:15 बजे के आसपास रहा. जैसे-जैसे रमजान आगे बढ़ेगा, दिन की अवधि बढ़ने के कारण रोजे का समय भी बढ़ सकता है, जो करीब 13 घंटे से अधिक हो सकता है. अलग-अलग शहरों में समय में थोड़ा अंतर संभव है.
रमजान का महीना केवल रोजा रखने तक सीमित नहीं होता, बल्कि यह आत्मसंयम, दान, सहानुभूति और आध्यात्मिक उन्नति का प्रतीक भी है. इस दौरान लोग जरूरतमंदों की मदद करते हैं, ज्यादा से ज्यादा इबादत करते हैं और अपने जीवन को बेहतर बनाने का प्रयास करते हैं.


