सोमवार को शिवलिंग पूजा में ये गलतियां न करें, वरना भोलेनाथ हो सकते हैं नाराज! जानें सही नियम

शिवलिंग की पूजा को भगवान शिव का सबसे प्रिय और सीधा रास्ता माना जाता है. मान्यता है कि सच्चे मन से की गई शिवलिंग पूजा से बाबा बहुत जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं और भक्त की हर मनोकामना पूरी कर देते हैं.

Goldi Rai
Edited By: Goldi Rai

नई दिल्ली: सनातन धर्म में सप्ताह के हर दिन का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है. इन्हीं में सोमवार का दिन भगवान भोलेनाथ को समर्पित होता है. इस दिन श्रद्धालु व्रत रखते हैं और पूरे विधि-विधान से भगवान शिव की आराधना करते हैं. मान्यता है कि सोमवार के दिन की गई सच्ची पूजा से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं.

विशेष रूप से शिवलिंग की पूजा को अत्यंत फलदायी माना गया है. भक्त जलाभिषेक, मंत्र जाप और विशेष पूजन के माध्यम से शिव कृपा पाने का प्रयास करते हैं. हालांकि, कई बार अनजाने में की गई छोटी-छोटी गलतियों के कारण पूजा का पूर्ण फल नहीं मिल पाता. ऐसे में यह जानना जरूरी है कि सोमवार के दिन शिवलिंग की पूजा किस विधि से करनी चाहिए और किन नियमों का पालन आवश्यक है.

शिवलिंग की पूजा में न करें ये गलतियां

शिवलिंग को वैराग्य का प्रतीक माना गया है, इसलिए इस पर कभी भी सिंदूर अर्पित नहीं करना चाहिए. इसके साथ ही हल्दी और कुमकुम चढ़ाना भी वर्जित माना गया है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हल्दी का संबंध सौंदर्य और सौभाग्य से होता है और इसका प्रयोग मां पार्वती की पूजा में किया जाता है.

इसके अलावा, शिवलिंग पर भूलकर भी तुलसी न चढ़ाएं, क्योंकि तुलसी को भगवान शिव की पूजा या भोग में निषिद्ध बताया गया है. पूजा के दौरान टूटे हुए चावल अर्पित करने से भी बचना चाहिए, क्योंकि इन्हें अपूर्णता का प्रतीक माना जाता है. साथ ही, शिवलिंग पर शंख से जल अर्पित करना भी वर्जित माना गया है.

इस विधि से करें शिवलिंग की पूजा

सोमवार के दिन सुबह स्नान करने के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें. मंदिर या पूजा स्थल पर पहुंचकर सबसे पहले शिवलिंग पर शुद्ध जल अर्पित करें. इसके बाद पंचामृत से अभिषेक करें और फिर पुनः साफ जल से अभिषेक करें.

अभिषेक के बाद शिवलिंग पर चंदन लगाएं और बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल तथा भोग अर्पित करें. पूजा के दौरान “ऊं नम: शिवाय” मंत्र का जाप अवश्य करें. अंत में भगवान शिव की विधिवत आरती कर पूजा संपन्न करें. ऐसी मान्यता है कि इस विधि से की गई पूजा से भगवान भोलेनाथ शीघ्र प्रसन्न होते हैं.

Disclaimer: ये धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है, JBT इसकी पुष्टि नहीं करता.

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