फरीदाबाद की नेहरू कॉलोनी में बुलडोजर एक्शन शुरू, भारी पुलिस बल तैनात, हजारों परिवारों में बढ़ी चिंता
फरीदाबाद की नेहरू कॉलोनी में बुधवार सुबह शुरू हुए बुलडोजर एक्शन ने हजारों परिवारों की चिंता बढ़ा दी है. भारी पुलिस बल, बैरिकेडिंग और बंद रास्तों के बीच नगर निगम की टीम अवैध निर्माण हटाने की कार्रवाई में जुटी है. स्थानीय लोगों का कहना है कि बिना पुनर्वास व्यवस्था के यह अभियान उनके सामने बड़ा संकट खड़ा कर सकता है.

फरीदाबाद: फरीदाबाद की नेहरू कॉलोनी में बुधवार सुबह प्रशासन ने बड़े पैमाने पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी. नगर निगम की टीम भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंची और अवैध निर्माणों को हटाने के लिए बुलडोजर चलाया. कार्रवाई के दौरान पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई और कई प्रमुख मार्गों को बंद कर दिया गया.
अचानक शुरू हुए इस अभियान से क्षेत्र में रहने वाले लोगों के बीच चिंता का माहौल है. स्थानीय निवासियों का कहना है कि बड़ी संख्या में परिवार इस इलाके में वर्षों से रह रहे हैं और बिना वैकल्पिक व्यवस्था के की जा रही कार्रवाई से उनके सामने आवास का संकट खड़ा हो सकता है.
सुबह से चला तोड़फोड़ अभियान
बुधवार सुबह करीब 7 बजे नगर निगम की टीम ने नेहरू कॉलोनी में अतिक्रमण हटाने का अभियान शुरू किया. इस कार्रवाई के लिए 6 जेसीबी मशीनों और एक बड़ी तोड़फोड़ मशीन को लगाया गया. अधिकारियों की निगरानी में अवैध निर्माणों को हटाने का काम शुरू हुआ.
हालांकि प्रशासन की ओर से यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि अभियान के तहत कुल कितने मकानों को हटाया जाएगा.
पूरे इलाके को बनाया गया सुरक्षा क्षेत्र
कार्रवाई के दौरान किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए भारी संख्या में पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया. प्रशासन ने नेहरू कॉलोनी की ओर जाने वाले प्रमुख रास्तों पर बैरिकेडिंग कर दी और कई मार्गों को अस्थायी रूप से बंद कर दिया.
मेट्रो रोड, सैनिक कॉलोनी, बिजली दफ्तर मार्ग, मुल्ला होटल क्षेत्र और तारण नंबर की ओर जाने वाले रास्तों पर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई, जिससे लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ा.
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का हवाला
नगर निगम अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में की जा रही है. अधिकारियों का कहना है कि सार्वजनिक भूमि, सड़कों और ग्रीन बेल्ट पर बने अवैध निर्माणों को हटाने के आदेश दिए गए हैं.
प्रशासन का तर्क है कि सार्वजनिक उपयोग की जमीन को खाली कराना विकास कार्यों और अन्य परियोजनाओं के लिए आवश्यक है.
वर्षों पुरानी और घनी आबादी वाली बस्ती
स्थानीय लोगों के अनुसार, नेहरू कॉलोनी पुनर्वास विभाग की भूमि पर बसी एक पुरानी और घनी आबादी वाली बस्ती है. यहां करीब 10,000 मकान मौजूद हैं और लगभग 5 लाख लोगों का जीवन किसी न किसी रूप में इस क्षेत्र से जुड़ा हुआ है.
बताया जा रहा है कि पिछले वर्ष भी पुनर्वास विभाग की ओर से नोटिस जारी किए गए थे, लेकिन उसके बाद कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हुई थी. अब अचानक शुरू हुए अभियान ने लोगों की चिंताएं बढ़ा दी हैं.
पुनर्वास को लेकर उठे सवाल
कार्रवाई का विरोध कर रहे स्थानीय निवासियों का कहना है कि वे कानून का सम्मान करते हैं और पहले भी प्रशासनिक अभियानों में सहयोग कर चुके हैं. उनका कहना है कि मकान हटाने से पहले प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की व्यवस्था की जानी चाहिए थी.
निवासियों के अनुसार, उन्होंने अपनी मांगों को लेकर प्रशासनिक अधिकारियों से भी मुलाकात की थी और विस्थापित होने वाले परिवारों के लिए वैकल्पिक आवास की मांग रखी थी.


