नई दिल्ली: सनातन धर्म में भगवान विष्णु को समर्पित एकादशी तिथि का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है. फाल्गुन पूर्णिमा के बाद और चैत्र नवरात्रि से पहले आने वाली कृष्ण पक्ष की एकादशी को पापमोचनी एकादशी कहा जाता है. मान्यता है कि इस दिन व्रत और पूजा करने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिलती है और भगवान नारायण की विशेष कृपा प्राप्त होती है.
इस वर्ष पापमोचनी एकादशी रविवार के दिन पड़ रही है, जिससे इसका महत्व और बढ़ गया है. खास बात यह भी है कि इस दिन द्विपुष्कर योग का संयोग बन रहा है, जिसे धार्मिक कार्यों के लिए बेहद शुभ माना जाता है. ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार, इस योग में किए गए व्रत, पूजा और दान का फल कई गुना बढ़ जाता है. आइए जानते हैं 15 मार्च 2026 का विस्तृत पंचांग और शुभ-अशुभ समय.
दृक पंचांग के अनुसार, चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की पापमोचनी एकादशी तिथि 15 मार्च की सुबह 8 बजकर 10 मिनट से शुरू होकर अगले दिन सुबह 9 बजकर 16 मिनट तक रहेगी. हालांकि उदयातिथि के अनुसार 15 मार्च को पूरे दिन एकादशी तिथि का मान रहेगा.
इस दिन सूर्योदय सुबह 6 बजकर 31 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 6 बजकर 29 मिनट पर होगा. नक्षत्र की बात करें तो श्रवण नक्षत्र 16 मार्च की सुबह 5 बजकर 56 मिनट तक रहेगा, इसके बाद धनिष्ठा नक्षत्र शुरू हो जाएगा.
वहीं, परिघ योग सुबह 10 बजकर 25 मिनट तक रहेगा और करण बालव रहेगा.
रविवार के दिन कई महत्वपूर्ण शुभ मुहूर्त बन रहे हैं, जिनमें पूजा-पाठ और धार्मिक कार्य करना फलदायी माना जाता है.
इस दिन द्विपुष्कर योग का भी शुभ संयोग बन रहा है, जो धार्मिक अनुष्ठानों के लिए अत्यंत मंगलकारी माना जाता है.
ज्योतिष के अनुसार कुछ समय ऐसे होते हैं जिनमें नए या शुभ कार्य करने से बचना चाहिए.
इन समयों में किसी भी नए या महत्वपूर्ण कार्य की शुरुआत करने से परहेज करने की सलाह दी जाती है. First Updated : Sunday, 15 March 2026