नई दिल्ली: सनातन परंपरा में बहुत महत्व रखने वाली सोमवती अमावस्या आज यानी 15 जून, सोमवार को पूरे देश में बहुत श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाई जा रही है. इस वर्ष की अमावस्या को ज्योतिष की दृष्टि से बहुत दुर्लभ और ऐतिहासिक माना जा रहा है. आज ही के दिन 'अधिक मास' का समापन हो रहा है. इसके साथ ही सूर्य देव भी आज अपनी राशि बदलकर मिथुन राशि में प्रवेश कर रहे हैं. ज्योतिषविदों के अनुसार, ग्रहों और तिथियों का ऐसा महासंयोग दशकों बाद निर्मित हुआ है. जो इस दिन के आध्यात्मिक महत्व को कई गुना बढ़ा देता है.
उदया तिथि के मान से आज ही मनेगी अमावस्या
पंचांगीय गणना के अनुसार, अमावस्या तिथि का प्रारंभ कल यानी 14 जून को दोपहर 12 बजकर 20 मिनट पर हो चुका था, जिसका समापन आज 15 जून की सुबह 8 बजकर 24 मिनट पर हो रहा है. सनातन धर्म में सूर्योदय के समय मौजूद तिथि को सर्वोपरि माना जाता है. आज सभी प्रमुख धार्मिक अनुष्ठान, स्नान और दान आज सोमवार को ही किए जा रहे हैं.
शिव आराधना और नई शुरुआत का प्रतीक
चूंकि यह अमावस्या सोमवार के दिन पड़ी है, इसलिए इसे 'सोमवती अमावस्या' का नाम दिया गया है. सोमवार का दिन महादेव को समर्पित होता है, जिसके चलते आज के दिन शिव मंदिरों में जलाभिषेक और विशेष पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है.
जानिए महत्व
सांस्कृतिक महत्व: जिस तरह अमावस्या के घने अंधेरे के बाद चंद्रमा एक नई आभा के साथ दोबारा उदित होता है, ठीक उसी तरह इस तिथि को मानव जीवन में नई सकारात्मक ऊर्जा, उम्मीदों और नई शुरुआत के प्रतीक के रूप में देखा जाता है.
पितृ तर्पण और बुजुर्गों का सम्मान
धार्मिक मान्यताओं में अमावस्या की तिथि को पूर्वजों यानी पितरों की तृप्ति के लिए सबसे उत्तम माना गया है. आज के दिन लोग पवित्र नदियों में स्नान के बाद अपने दिवंगत पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान, तर्पण और श्राद्ध कर्म कर रहे हैं. मान्यता है कि आज के दिन किया गया तर्पण कुल में सुख-समृद्धि लाता है. विद्वानों का यह भी मत है कि असली पितृभक्ति केवल कर्मकांडों में नहीं, बल्कि जीवित माता-पिता और घर के बुजुर्गों की सेवा व सम्मान करने में है.
स्नान-दान के शुभ मुहूर्त
आज के दिन सेवा और परोपकार का विशेष फल मिलता है. लोग अपनी सामर्थ्य के अनुसार भूखों को अन्न, प्यासों को पानी और जरूरतमंदों को वस्त्र दान कर रहे हैं. आज दिन के दो सबसे प्रमुख और शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं.
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:02 बजे से लेकर सुबह 4:42 बजे तक. यह समय पवित्र स्नान और मंत्र जाप के लिए सर्वोत्तम रहा.
गोधूलि मुहूर्त: शाम को 7:17 बजे से लेकर शाम 7:37 बजे तक यह समय सायंकालीन आरती, दीपदान और शिव आराधना के लिए विशेष फलदायी रहेगा. First Updated : Monday, 15 June 2026